मध्य प्रदेश के खरगोन में शुक्रवार को सैकड़ों नर्सिंग छात्रों ने एक सांसद के दफ्तर पर जोरदार प्रदर्शन किया। छात्रों की मांग है कि उनकी 4 साल की डिग्री 6 साल में भी पूरी नहीं हो पा रही है, इस समस्या का जल्द हल निकाला जाए। यह विरोध राज्य के नर्सिंग शिक्षा क्षेत्र में चल रहे संकट को उजागर करता है, जो एक बड़े कॉलेज रिकॉग्निशन स्कैम के कारण पहले से ही जांच के घेरे में है।
6 साल में भी अधूरी डिग्री, छात्र हुए बेहाल
शुक्रवार को मध्य प्रदेश के खरगोन शहर में सैकड़ों नर्सिंग छात्रों का हुजूम उमड़ पड़ा। ये छात्र अपनी परीक्षाओं और डिग्री मिलने में हो रही भारी देरी के खिलाफ सड़कों पर उतरे थे। हालात तब और बिगड़ गए जब छात्रों ने पुलिस बैरिकेड तोड़कर सांसद गजेंद्र सिंह पटेल के ऑफिस में घुसने की कोशिश की। यह विरोध प्रदर्शन राज्य भर में नर्सिंग शिक्षा क्षेत्र में महीनों से चल रहे आंदोलन का एक नया रूप है।
छात्रों की सबसे बड़ी परेशानी यह है कि उनका 4 साल का नर्सिंग कोर्स खिंचकर 6 साल का हो गया है, और अभी तक उन्हें डिग्री नहीं मिली है। इस देरी ने हजारों छात्रों को प्रोफेशनल तौर पर अधर में लटका दिया है। वे न तो प्रैक्टिस के लिए रजिस्टर कर पा रहे हैं और न ही नौकरी हासिल कर पा रहे हैं। कई छात्रों के लिए यह स्थिति भारी आर्थिक और मानसिक बोझ बन गई है, क्योंकि वे काम शुरू करने के रास्ते में प्रशासनिक और कानूनी बाधाओं से जूझ रहे हैं।
बड़े स्कैम का साया
यह विरोध प्रदर्शन मध्य प्रदेश में नर्सिंग सेक्टर को प्रभावित करने वाले एक बड़े, सिस्टमैटिक संकट का हिस्सा है। यह मामला कई निजी संस्थानों पर ठीक से इंफ्रास्ट्रक्चर, फैकल्टी न होने और मान्यता मानकों का पालन न करने के आरोपों से जुड़ा है। इस पूरे मामले की जांच CBI कर रही है और कोर्ट भी इस पर कड़ी नजर बनाए हुए है।
कानूनी और नियामक अनिश्चितता के कारण, राज्य भर के कई छात्रों के एग्जाम रोक दिए गए हैं और रिजल्ट भी होल्ड पर रखे गए हैं। जहाँ छात्र तुरंत एग्जाम और डिग्री देने की मांग कर रहे हैं, वहीं राज्य सरकार और शिक्षा प्राधिकरण के सामने यह चुनौती है कि वे जांच के दौरान पकड़े गए अनियमित संस्थानों और सही संस्थानों के बीच कैसे अंतर करें।
शिक्षा की विश्वसनीयता पर सवाल
शिक्षा क्षेत्र से जुड़े लोगों के लिए, चल रहे विरोध प्रदर्शन और स्कैम के आरोप इस क्षेत्र में प्राइवेट नर्सिंग एजुकेशन की विश्वसनीयता पर एक बड़ा सवाल खड़ा करते हैं। कोर्ट में कॉलेज की पहचान की वैधता पर सवाल उठने के कारण, इस समस्या का त्वरित समाधान मुश्किल नजर आ रहा है।
राज्य के कई जिलों में छात्र लगातार विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं, जिससे साफ है कि जब तक डिग्री पूरी करने का कोई स्पष्ट रास्ता नहीं दिखाया जाता, यह अशांति खत्म होने वाली नहीं है। छात्रों और जानकारों की नजर अब कोर्ट की सुनवाई और CBI जांच की टाइमलाइन पर टिकी है, जो अंततः तय करेगा कि प्रभावित छात्र कब ग्रेजुएट हो पाएंगे या राज्य के नर्सिंग शिक्षा को सामान्य करने के लिए और क्या कदम उठाने होंगे।
