मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने अवैध शराब सिंडिकेट को पनाह देने वाले नेताओं को कड़ी चेतावनी दी है। 2 नवंबर को पुलिस अधिकारी दिलीप पुरी की शहादत के बाद राज्य सरकार ने संगठित अपराध के खिलाफ बड़े ऑपरेशन की शुरुआत की है, जिससे शराब वितरण सेक्टर में सख्ती बढ़ सकती है।
नेताओं पर कार्रवाई की तलवार
मुख्यमंत्री मोहन यादव ने 5 नवंबर, 2026 को स्पष्ट कर दिया है कि अवैध शराब तस्करी से जुड़े या उसे संरक्षण देने वाले किसी भी नेता को बख्शा नहीं जाएगा। सरकार ने ऐसे तत्वों को जेल या राज्य से बाहर भेजने की चेतावनी दी है। यह कड़ा रुख देवास जिले के खतेगांव थाना प्रभारी दिलीप पुरी की दर्दनाक मौत के बाद आया है।
घटना का पूरा घटनाक्रम
2 नवंबर को अधिकारी दिलीप पुरी 1,800 लीटर अवैध शराब ले जा रहे ट्रक को रोकने की कोशिश कर रहे थे, तभी कुचलकर उनकी हत्या कर दी गई। इस घटना में कॉन्स्टेबल सोहन जाट भी घायल हुए। पुलिस ने मामले में त्वरित कार्रवाई करते हुए मुख्य आरोपी राहुल जायसवाल को गिरफ्तार कर लिया है और 5 जिलों में सर्च ऑपरेशन चलाया जा रहा है।
बिजनेस और लॉजिस्टिक्स पर असर
सरकार के इस सख्त रुख का असर राज्य के ट्रांसपोर्ट रूट, ढाबों और वितरण नेटवर्क पर पड़ेगा। प्रशासन द्वारा अब हर स्तर पर सख्ती बरती जाएगी, जिससे वैध शराब कारोबार और सप्लाई चेन से जुड़ी कंपनियों को कड़े व्हीकल चेक और डॉक्यूमेंटेशन नियमों का सामना करना पड़ सकता है।
सरकार ने पीड़ित परिवार को ₹1 करोड़ के मुआवजे और अनुकंपा नियुक्ति की घोषणा की है। इस पूरे मामले में अब राजनीतिक सरगर्मियां तेज हो गई हैं, जहां विपक्ष ने कानून-व्यवस्था पर सवाल उठाए हैं। आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि क्या यह जांच बड़े राजनीतिक चेहरों तक पहुंचती है या नहीं। निवेशकों के लिए फिलहाल क्षेत्र में लॉजिस्टिक्स और एक्साइज अनुपालन (Compliance) पर नजर रखना जरूरी है।
