Ministry of Corporate Affairs (MCA) ने साल 2023 में Drone Federation India द्वारा नाम बदलने की प्रक्रिया के दौरान सबमिट किए गए एक फर्जी NOC को पकड़ा है। शुरुआती जांच में धोखाधड़ी के संकेत मिले थे, लेकिन वर्तमान कानूनी कार्यवाही टेक्निकल नियमों के उल्लंघन पर केंद्रित है।
MCA (Ministry of Corporate Affairs) ने Drone Federation India के खिलाफ नियामक जांच शुरू कर दी है। यह मामला तब सामने आया जब संस्था ने अपना नाम 'Drone Federation India' से बदलकर 'Drone Federation of India' करने के लिए 2023 में आवेदन किया था। इस प्रक्रिया के तहत संस्था ने DGCA (Directorate General of Civil Aviation) से जारी एक NOC (No-Objection Certificate) पेश किया था।
फर्जीवाड़े का खुलासा
जांच में पता चला कि वह NOC पूरी तरह से फर्जी था। डॉक्यूमेंट में एक ऐसी फाइल संख्या दर्ज थी जिसका कोई अस्तित्व ही नहीं है, और उस पर एक ऐसे अधिकारी के हस्ताक्षर थे जो डॉक्यूमेंट की तारीख से बहुत पहले ही रिटायर हो चुके थे।
कानूनी पेंच और आरोप
शुरुआती इंस्पेक्शन रिपोर्ट में संस्था के लीडर्स और कंपनी सेक्रेटरी पर Companies Act की Section 447 और Section 448 (धोखाधड़ी और गलत बयानबाजी) के तहत केस दर्ज करने की सिफारिश की गई थी। हालांकि, मुंबई की 37वीं कोर्ट में चल रही मौजूदा कानूनी कार्यवाही में इन गंभीर धोखाधड़ी के आरोपों को शामिल नहीं किया गया है। वर्तमान में केस संस्था के निदेशकों—राहत कुलश्रेष्ठ, प्रवीण विनोद प्रजापति और विपुल सिंह—के खिलाफ कॉर्पोरेट रिकॉर्ड्स और फाइनेंशियल अकाउंट्स मेंटेनेंस से जुड़ी टेक्निकल खामियों पर टिका है।
CVC और PIL की एंट्री
इस मामले ने अब तूल पकड़ लिया है क्योंकि CVC (Central Vigilance Commission) के सामने शिकायतें दर्ज हुई हैं और एक PIL भी दाखिल की गई है। इसमें सवाल उठाए गए हैं कि आखिर धोखाधड़ी के सिफारिशी आरोपों को अंतिम कानूनी कार्यवाही से क्यों हटा दिया गया। वहीं, Drone Federation India ने किसी भी तरह की गड़बड़ी से इनकार किया है।
निवेशकों के लिए नोट: Drone Federation India एक प्राइवेट, गैर-लाभकारी संस्था है और यह शेयर बाजार में लिस्टेड नहीं है, इसलिए इसका बाजार पर कोई सीधा असर नहीं पड़ेगा।
