Long Notice Periods Cost Professionals Salary Hikes: नौकरी छूटी, 60% Salary Hike गई!

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AuthorMehul Desai|Published at:
Long Notice Periods Cost Professionals Salary Hikes: नौकरी छूटी, 60% Salary Hike गई!

एक चार्टर्ड अकाउंटेंट ने बताया कि कैसे 2 महीने के नोटिस पीरियड के कारण उनके दोस्त की 60% सैलरी बढ़ोतरी वाली नौकरी चली गई। यह मामला दर्शाता है कि कैसे लम्बे नोटिस पीरियड करियर ग्रोथ में बाधा डाल सकते हैं और भारी कमाई का नुकसान करा सकते हैं।

नोटिस पीरियड का भारी झटका!

बेंगलुरु के एक चार्टर्ड अकाउंटेंट (CA) ने हाल ही में एक ऐसा किस्सा साझा किया है, जिसने भारतीय जॉब मार्केट में 'नोटिस पीरियड' के मुद्दे को फिर से गरमा दिया है। उनके एक दोस्त को एक नई नौकरी का ऑफर मिला था, जिसमें 60% की बंपर सैलरी बढ़ोतरी का वादा था। लेकिन, इस ऑफर पर ग्रहण लग गया क्योंकि कंपनी को सिर्फ 4 हफ़्ते में ज्वॉइनिंग चाहिए थी, जबकि मौजूदा कंपनी का नोटिस पीरियड 8 हफ़्ते (2 महीने) का था।

करियर ग्रोथ पर असर

सिर्फ एक नौकरी गंवाने की बात नहीं है, यह मामला हमें इस बारे में सोचने पर मजबूर करता है कि लम्बे नोटिस पीरियड का प्रोफेशनल करियर पर कितना बड़ा आर्थिक असर पड़ता है। ज़्यादातर प्रोफेशनल अपनी सैलरी बढ़ाने के लिए करियर में कई बार जॉब बदलते हैं। हर बार जब नौकरी बदलने में 2 महीने या उससे ज़्यादा की देरी होती है, तो इसका सीधा असर कमाई पर पड़ता है। खासतौर पर हाई सैलरी ब्रैकेट में, कुछ महीनों की देरी से भी लाखों रुपये का नुकसान हो सकता है। ऐसे में, एम्प्लॉयमेंट कॉन्ट्रैक्ट का स्ट्रक्चर सीधे तौर पर प्रोफेशनल की लाइफटाइम इनकम को सीमित कर सकता है।

मार्केट की जरूरत और कंपनी की पॉलिसी में टकराव

आजकल की तेज़ रफ़्तार हायरिंग के दौर में, कंपनियाँ अपने काम को सुचारू रूप से चलाने के लिए लम्बे नोटिस पीरियड का प्रावधान रखती हैं। इसका मकसद होता है कि एक एम्प्लॉई जाने से पहले अपनी जिम्मेदारियों और ज़रूरी जानकारी को ठीक से ट्रांसफर कर दे। लेकिन, दूसरी तरफ, हायरिंग कंपनियाँ, खासकर अर्जेंट या स्पेशल रोल्स के लिए, तुरंत ज्वॉइन करने वाले कैंडिडेट को ज़्यादा अहमियत दे रही हैं। इस गैप की वजह से, जो प्रोफेशनल नई और बेहतर नौकरी के लिए तैयार हैं, वे अपने पुराने कॉन्ट्रैक्ट की वजह से पिछड़ जाते हैं।

असमानता का मुद्दा

लंबे नोटिस पीरियड की आलोचना करने वाले अक्सर एम्प्लॉयर और एम्प्लॉई के बीच पावर के असंतुलन की ओर इशारा करते हैं। कंपनियाँ अक्सर छोटे नोटिस पीरियड पर या तुरंत भुगतान करके एम्प्लॉई को निकाल सकती हैं, लेकिन एम्प्लॉई को आमतौर पर पूरे नोटिस पीरियड को सर्व करना पड़ता है। यह सिमेट्रि की कमी प्रोफेशनल्स के लिए एक बड़ी परेशानी है। अब सवाल यह उठता है कि क्या कंपनियों को ज़्यादा फ्लेक्सिबल पॉलिसी अपनानी चाहिए, जैसे कि नोटिस पीरियड को 'बाय-आउट' करने का विकल्प देना, या फिर इंडस्ट्री स्टैंडर्ड को कम करके आज की हायरिंग प्रैक्टिस के मुताबिक लाना चाहिए। फिलहाल, कैंडिडेट इस कश्मकश में फंसे हैं कि कॉन्ट्रैक्ट का पालन करें या तेज़ जॉब मार्केट में कॉम्पिटिटिव बने रहें।

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