वित्त वर्ष 2026 (FY26) में लाइफ इंश्योरेंस कंपनियों के खिलाफ ग्राहकों की शिकायतों का आंकड़ा **98,443** के पार पहुंच गया है। इनमें से **41%** शिकायतें क्लेम (दावों) से जुड़ी हुई हैं। यह बड़ी संख्या बीमा सेक्टर के सामने आ रही परिचालन चुनौतियों और IRDAI की कड़ी निगरानी को दर्शाती है।
दावों के निपटान में सबसे ज्यादा दिक्कतें
वित्त वर्ष 2025-26 में भारतीय लाइफ इंश्योरेंस कंपनियों के पास कुल 98,443 ग्राहक शिकायतें दर्ज की गईं। यह आंकड़ा बीमा के सभी सेगमेंट्स में सबसे ज्यादा है। राज्यसभा में पेश किए गए आंकड़ों के मुताबिक, जनरल इंश्योरेंस कंपनियों के पास 95,258 शिकायतें थीं, जबकि हेल्थ इंश्योरेंस कंपनियों को 41,658 मामलों का सामना करना पड़ा। निवेशकों और पॉलिसीधारकों के लिए, यह आंकड़े बीमा कंपनियों की कस्टमर सर्विस और उनके कामकाज के स्टैंडर्ड्स को समझने में मदद करते हैं।
क्लेम और गलत व्यापारिक तरीके
इन शिकायतों की सबसे बड़ी वजह क्लेम से जुड़े मुद्दे रहे, जो पूरे सेक्टर में शिकायतों का 41% से ज्यादा हिस्सा थे। बीमा कंपनियों को 1.23 लाख से अधिक क्लेम-संबंधी मामलों को निपटाना पड़ा। क्लेम के अलावा, ग्राहकों की नाराजगी के अन्य प्रमुख कारण गलत व्यापारिक तरीके (unfair business practices) और पॉलिसी की शर्तों (terms and conditions) को लेकर चिंताएं थीं। इन मुद्दों की बढ़ती संख्या कंपनी की इमेज को नुकसान पहुंचाने और नियामकों की तरफ से कड़ी कार्रवाई का जोखिम बढ़ाती है।
नए वित्तीय वर्ष की पहली तिमाही का हाल
मौजूदा वित्तीय वर्ष की पहली तिमाही (1 अप्रैल से 30 जून 2026) के नए आंकड़े बताते हैं कि लंबित शिकायतों के वितरण में बदलाव आया है। जनरल इंश्योरर्स के पास सबसे ज्यादा 3,483 लंबित शिकायतें थीं। इसी तीन महीने की अवधि में, लाइफ इंश्योरर्स को 24,034 नई शिकायतें मिलीं, जबकि जनरल और हेल्थ इंश्योरर्स को क्रमशः 26,675 और 12,269 शिकायतें प्राप्त हुईं।
रेगुलेटरी एक्शन और निगरानी
भारतीय बीमा नियामक एवं विकास प्राधिकरण (IRDAI) सेवा मानकों पर अपनी कड़ी नजर बनाए हुए है। वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने पुष्टि की है कि नियामक इन शिकायतों पर प्रभावी ढंग से कार्रवाई करने का अधिकार रखता है। महत्वपूर्ण बात यह है कि IRDAI ने हाल ही में उन बीमा कंपनियों पर भारी मौद्रिक जुर्माना लगाने की शक्ति बढ़ाई है, जो सेवा संबंधी दायित्वों को पूरा करने में विफल रहती हैं या गलत तरीके अपनाती हैं।
निवेशकों के लिए, यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि बीमा कंपनियां क्लेम निपटाने की प्रक्रिया और पारदर्शिता में कैसे सुधार करती हैं ताकि शिकायतों का बैकलॉग कम हो सके। शिकायतों का यह उच्च स्तर सख्त ऑडिट, नियामकीय जुर्माने से जुड़ी परिचालन लागत और अत्यधिक प्रतिस्पर्धी बाजार में ब्रांड वैल्यू पर दबाव डाल सकता है, जहां ग्राहक का भरोसा ही सबसे बड़ा बिजनेस ड्राइवर है।
