35 के बाद भी 'फिटनेस के किंग'! Messi और Dhoni से सीखें लंबी उम्र तक टॉप फॉर्म में रहने के गुर

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AuthorKaran Malhotra|Published at:
35 के बाद भी 'फिटनेस के किंग'! Messi और Dhoni से सीखें लंबी उम्र तक टॉप फॉर्म में रहने के गुर

क्या 35 की उम्र पार करने के बाद फिटनेस में गिरावट आना तय है? दिग्गज एथलीट Lionel Messi और M.S. Dhoni जैसे खिलाड़ी इस सोच को चुनौती दे रहे हैं। वे सिर्फ ट्रेनिंग की इंटेंसिटी पर नहीं, बल्कि स्मार्ट ट्रेनिंग, खास डाइट और एडवांस रिकवरी पर फोकस कर रहे हैं, जिससे वे सालों तक टॉप परफॉर्मेंस दे पा रहे हैं। यह आम लोगों के लिए भी लंबी उम्र तक फिट रहने का बेहतरीन सबक है।

उम्र को मात देते खिलाड़ी!

आम तौर पर माना जाता है कि 20s में पीक परफॉर्मेंस के बाद 30s में फिटनेस गिरने लगती है। लेकिन Lionel Messi, M.S. Dhoni और Novak Djokovic जैसे स्पोर्ट्स स्टार्स 30s और 40s में भी कमाल का प्रदर्शन कर रहे हैं। ये साबित करते हैं कि साइंस-बेस्ड लाइफस्टाइल बदलावों से एथलेटिक लाइफ को लंबा खींचा जा सकता है। जहां कई लोग इस उम्र के बाद ज़्यादातर समय बैठे-बैठे बिताते हैं, वहीं ये एथलीट बताते हैं कि ट्रेनिंग रूटीन में बदलाव करके उम्र के साथ आने वाले शारीरिक बदलावों को कैसे रोका जा सकता है।

स्मार्ट ट्रेनिंग और शरीर का तालमेल

35 की उम्र के बाद शरीर में तेज़ी वाले मसल फाइबर (fast-twitch muscle fibers) कम होने लगते हैं, जो तेज़ दौड़ने और ज़ोरदार एक्शन के लिए ज़रूरी हैं। ऐसे में, युवावस्था वाली ट्रेनिंग इंटेंसिटी बनाए रखने की बजाय, ये खिलाड़ी अपनी भूमिकाएं और रूटीन बदलते हैं। स्पोर्ट्स मेडिसिन एक्सपर्ट्स के अनुसार, वे अब टैक्टिकल समझ और कम इम्पैक्ट वाली ट्रेनिंग पर ज़्यादा ध्यान देते हैं। उदाहरण के लिए, भारी वेट लिफ्टिंग की जगह ऐसे एक्सरसाइज करते हैं जो कोर को मज़बूत बनाएं, जोड़ों को लचीला रखें और टेंडन्स को चोट से बचाएं।

डाइट और रिकवरी के मॉडर्न तरीके

डाइट सिर्फ कैलोरी गिनने तक सीमित नहीं रही, बल्कि अब ये एंटी-इंफ्लेमेटरी और गट-हेल्थ पर फोकस वाली पर्सनल डाइट बन गई है। इसका मकसद शरीर के टिश्यू को जल्दी ठीक करना और मेटाबॉलिज़्म को बेहतर बनाना है। रिकवरी अब रूटीन का एक अहम हिस्सा बन चुकी है। पहले सिर्फ प्रोफेशनल खिलाड़ी इस्तेमाल करते थे, ऐसी टेक्नोलॉजी जैसे क्रायोथेरेपी (cryotherapy) और हाइपरबेरिक चैंबर्स (hyperbaric chambers) अब आम फिटनेस लवर्स के लिए भी उपलब्ध हैं। ये तरीके, स्लीप ट्रैकिंग और रेस्ट मैनेजमेंट के साथ मिलकर शरीर को रिकवर करने में मदद करते हैं।

लंबी उम्र की ओर बढ़ता कदम

आम लोगों के लिए सबसे बड़ा सबक यह है कि फिटनेस को लेकर 'लॉन्गेविटी-फोकस्ड' माइंडसेट अपनाना। यानी, ज़्यादा मेहनत करने की बजाय 'स्मार्ट' तरीके से ट्रेनिंग करना। अपने शरीर के संकेतों को समझना – कब ज़ोर लगाना है और कब आराम करना है – यह सीखकर कोई भी अपनी फिटनेस को दशकों तक बनाए रख सकता है। कंसिस्टेंसी (consistency) यानी नियमितता ही सफलता की कुंजी है। किसी प्रोफेशनल एथलीट की तरह हाई-टेक रूटीन फॉलो करना ज़रूरी नहीं है, लेकिन रेगुलर स्ट्रेंथ ट्रेनिंग, मोबिलिटी एक्सरसाइज और पर्याप्त आराम से स्वस्थ बुढ़ापा पाया जा सकता है। लक्ष्य यह है कि अपनी क्षमता के अनुसार एक्टिव लाइफस्टाइल बनाए रखें और जीवन भर शारीरिक रूप से स्वस्थ रहें।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.