Lenskart Solutions के शेयरों में आज **2%** से ज्यादा की तेजी देखी गई। कंपनी ने जून तिमाही के नतीजे जारी किए हैं, जिनमें **₹228 करोड़** से ज्यादा का मुनाफा हुआ है। हालांकि, कंपनी के हाई वैल्यूएशन और ग्लोबल विस्तार पर निवेशकों की नजर रहेगी।
कमाई में जोरदार उछाल
Lenskart Solutions के शेयरों ने बुधवार को 2.12% की बढ़त के साथ ₹641.70 का स्तर छुआ। यह उछाल कंपनी के जून 2026 को खत्म हुई पहली तिमाही के शानदार नतीजों के बाद आया है। कंपनी के रेवेन्यू और मुनाफे, दोनों में जबरदस्त बढ़ोतरी हुई है, जो इस कॉम्पिटिटिव आईवियर मार्केट में कंपनी की मजबूत पकड़ को दिखाता है।
दमदार फाइनेंशियल ग्रोथ
जून 2026 तिमाही के लिए, Lenskart ने ₹2,714.18 करोड़ का कंसोलिडेटेड रेवेन्यू दर्ज किया, जो पिछले साल की इसी अवधि के मुकाबले काफी ज्यादा है। वहीं, नेट प्रॉफिट बढ़कर ₹227.96 करोड़ हो गया। इस शानदार परफॉर्मेंस का श्रेय कंपनी की ओमनीचैनल स्ट्रैटेजी (ऑनलाइन बिक्री और फिजिकल स्टोर्स का मजबूत नेटवर्क) और लगातार जारी ग्लोबल विस्तार को दिया जा रहा है। हाल ही में कंपनी ने ₹1 ट्रिलियन मार्केट कैप का बड़ा मुकाम भी हासिल किया है।
ग्लोबल विस्तार और रणनीति
Lenskart अपनी ग्लोबल मौजूदगी को बढ़ाने के लिए तेजी से काम कर रही है। कंपनी चीन और दक्षिण कोरिया जैसे बाजारों में नए बिजनेस यूनिट्स खोल रही है, जिनमें Wenzhou Framekart Trade और OWNDAYS Korea जैसी एंटिटीज शामिल हैं। यह कंपनी की सप्लाई चेन को बढ़ाने और भारत के बाहर बड़े ग्राहक आधार तक पहुंचने की एक बड़ी रणनीति का हिस्सा है। कंपनी ने Baofeng Framekart जॉइंट वेंचर में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाने और कर्मचारियों को ESOPs देने जैसे कॉर्पोरेट एक्शन पर भी काम किया है।
वैल्यूएशन और रिस्क फैक्टर्स
जहां ग्रोथ के आंकड़े सकारात्मक हैं, वहीं कुछ ऐसे फैक्टर भी हैं जिन पर लॉन्ग-टर्म निवेशक बारीकी से नजर रख रहे हैं। कंपनी का स्टॉक अपनी कमाई के मुकाबले हाई वैल्यूएशन पर ट्रेड कर रहा है, जिसमें P/E (प्राइस-टू-अर्निंग) और P/B (प्राइस-टू-बुक) वैल्यू प्रीमियम लेवल पर हैं। इसका मतलब है कि शेयर में भविष्य की काफी ग्रोथ पहले से ही शामिल है। इसके अलावा, कंपनी ने अभी तक कोई डिविडेंड देना शुरू नहीं किया है, जो कि आक्रामक विस्तार पर ध्यान केंद्रित करने वाली कंपनियों के लिए आम बात है, लेकिन यह आय चाहने वाले निवेशकों के लिए ध्यान देने योग्य है।
शेयर होल्डिंग पैटर्न भी एक महत्वपूर्ण पहलू है। प्रमोटर की हिस्सेदारी लगभग 17.5% है। यह अपेक्षाकृत कम प्रमोटर होल्डिंग, बड़े इंस्टीट्यूशनल निवेशकों की मौजूदगी के साथ, बाजार के प्रति संवेदनशीलता बढ़ाती है। निवेशक इस बात पर नजर रखेंगे कि कंपनी ग्लोबल प्रोजेक्ट्स को फंड करते हुए और अंतरराष्ट्रीय सब्सिडियरीज की जटिलताओं को संभालते हुए इन हाई प्रॉफिट मार्जिन को बनाए रख पाती है या नहीं।
