Leapfrog Engineering Services लिमिटेड 17 जून, 2026 को अपना IPO (Initial Public Offering) लॉन्च करने जा रही है। यह कंपनी BSE SME प्लेटफॉर्म पर 88.51 करोड़ रुपये जुटाने की योजना बना रही है। शेयर की कीमत 21 से 23 रुपये प्रति शेयर रखी गई है।
क्या है Leapfrog Engineering Services?
यह कंपनी इंजीनियरिंग, प्रोक्योरमेंट, कंस्ट्रक्शन और कमीशनिंग (EPCC) के क्षेत्र में काम करती है। सीधे शब्दों में कहें तो, यह दूसरी कंपनियों के लिए जटिल सिस्टम्स की डिजाइनिंग, सामग्री की खरीद, निर्माण और इंस्टॉलेशन का काम करती है। Leapfrog Engineering इलेक्ट्रिकल सिस्टम्स, ऑटोमेशन, फायर प्रोटेक्शन और इंडस्ट्रियल इंफ्रास्ट्रक्चर जैसे क्षेत्रों में अपनी सेवाएं देती है।
मजबूत ऑर्डर बुक, लेकिन फोकस गल्फ पर
कंपनी ऑयल एंड गैस, फार्मा, फूड प्रोसेसिंग, मेटल और यूटिलिटीज जैसे कई उद्योगों को अपनी सेवाएं देती है। Leapfrog Engineering के लिए बड़ी बात यह है कि इसका एक बड़ा हिस्सा अंतरराष्ट्रीय प्रोजेक्ट्स पर निर्भर है। कंपनी के पास 384 करोड़ रुपये से अधिक का ऑर्डर बुक है, जिसमें से 327 करोड़ रुपये से ज़्यादा का काम गल्फ कोऑपरेशन काउंसिल (GCC) देशों, खासकर कुवैत और बहरीन जैसे देशों से आया है। यह साफ दिखाता है कि कंपनी का ग्रोथ अभी इन देशों की मांग और आर्थिक स्थिति पर बहुत ज़्यादा निर्भर है।
IPO का स्ट्रक्चर और फाइनेंसियल हेल्थ
कुल 88.51 करोड़ रुपये के इस IPO में दो हिस्से हैं। लगभग 79.60 करोड़ रुपये फ्रेश इश्यू के ज़रिए आएंगे, जिसमें कंपनी 3.46 करोड़ इक्विटी शेयर जारी करेगी। इस पैसे का इस्तेमाल कंपनी अपने बिजनेस ऑपरेशंस को सपोर्ट करने के लिए करेगी। बाकी बचे 8.91 करोड़ रुपये ऑफर फॉर सेल (OFS) के तहत आएंगे, जिसमें मौजूदा शेयरधारक लगभग 38.75 लाख शेयर बेचेंगे। यह पैसा सीधे शेयर बेचने वाले शेयरधारकों को जाएगा।
वित्तीय वर्ष 2025 के लिए, कंपनी ने 134.66 करोड़ रुपये का रेवेन्यू दर्ज किया। वहीं, इसका ऑपरेटिंग प्रॉफिट (EBITDA) 21.57 करोड़ रुपये और टैक्स के बाद का मुनाफा (Profit After Tax) 16.22 करोड़ रुपये रहा।
निवेशकों के लिए रिस्क फैक्टर
SME IPOs में निवेश करने वाले निवेशकों को कुछ बातों का ध्यान रखना चाहिए। सबसे पहले, SME शेयरों में ट्रेडिंग वॉल्यूम अक्सर मेनबोर्ड के शेयरों की तुलना में कम होता है, जिससे इनमें ज़्यादा अस्थिरता (Volatility) देखी जा सकती है और इन्हें खरीदना-बेचना मुश्किल हो सकता है।
दूसरे, कंपनी का बिजनेस भौगोलिक रूप से केंद्रित है। गल्फ देशों पर ज़्यादा निर्भरता होने के कारण, इन क्षेत्रों में कोई भी राजनीतिक या आर्थिक अस्थिरता कंपनी के प्रोजेक्ट्स को पूरा करने या समय पर भुगतान मिलने में बाधा डाल सकती है। प्रोजेक्ट-आधारित व्यवसायों में देरी का जोखिम भी रहता है, जिससे लागत बढ़ सकती है और प्रॉफिट मार्जिन पर असर पड़ सकता है। साथ ही, यह एक प्रतिस्पर्धी क्षेत्र है जहां नए कॉन्ट्रैक्ट्स जीतना रेवेन्यू ग्रोथ बनाए रखने के लिए ज़रूरी है।
निवेशकों को क्या देखना चाहिए?
निवेशकों के लिए सबसे अहम बात यह होगी कि कंपनी अपने मौजूदा 384 करोड़ रुपये के ऑर्डर बुक को कितनी कुशलता से पूरा करती है। प्रोजेक्ट की समय-सीमाओं पर अपडेट्स पर नज़र रखना ज़रूरी है, क्योंकि देरी से लागत बढ़ सकती है।
आने वाले तिमाही नतीजों में कंपनी के रेवेन्यू और प्रॉफिट के रुझानों पर नज़र रखना भी मददगार होगा, ताकि यह पता चल सके कि मध्य पूर्व में हुई ग्रोथ कितनी टिकाऊ है। अंत में, मैनेजमेंट की ओर से अन्य क्षेत्रों में नए ऑर्डर जीतने को लेकर दी जाने वाली टिप्पणियों पर ध्यान देना, यह समझने में मदद कर सकता है कि कंपनी गल्फ पर अपनी भारी निर्भरता को कम करने में कितनी सफल हो रही है।
