सुरक्षा बलों को बड़ी कामयाबी मिली है। बडगाम में चले एक एनकाउंटर में Lashkar-e-Taiba के टॉप कमांडर मोहम्मद आसिफ उर्फ हाशिम मूसा को मार गिराया गया है। यह आतंकी कई बड़ी साजिशों का मास्टरमाइंड था, जिसका खात्मा घाटी में पर्यटन और इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स की सुरक्षा के लिए एक बड़ा मील का पत्थर माना जा रहा है।
पाकिस्तान आर्मी का पूर्व कमांडो था मूसा
इस ऑपरेशन को बडगाम के यूसमर्ग इलाके में अंजाम दिया गया। मारा गया आतंकी मोहम्मद आसिफ, जो हाशिम मूसा के नाम से भी जाना जाता था, पाकिस्तान आर्मी की स्पेशल सर्विसेज ग्रुप (SSG) का पूर्व कमांडो था। सुरक्षा बलों ने करीब 45 दिनों तक उसका पीछा किया, जिसके बाद आखिरकार उसे मार गिराया गया।
घावों पर लगा रहा था शहद
आतंकी की हताशा का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि पकड़े गए उसके सहयोगियों से बरामद फोन के डेटा से पता चला है कि मूसा राजौरी और पुंछ के घने जंगलों में 45 दिनों से छिपा था। गोली लगने के बाद वह इलाज न मिलने पर अपने घावों पर शहद लगा रहा था, जो उसकी लाचारी को दर्शाता है।
इकोनॉमी और इंफ्रास्ट्रक्चर पर क्या होगा असर?
निवेशकों और बाजार के जानकारों के लिए जम्मू-कश्मीर की सुरक्षा स्थिति एक अहम पैरामीटर है। मूसा 2025 के पहलगाम हमले और 2024 में गांदरबल के गांगगीर टनल प्रोजेक्ट पर हुए हमले का मुख्य सूत्रधार था। इन घटनाओं ने पहले इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स के काम में बाधा डाली थी। अब इस हाई-प्रोफाइल टारगेट के खात्मे से क्षेत्र में स्थिरता आएगी, जिससे टूरिज्म और कनेक्टिविटी से जुड़ी परियोजनाओं को फिर से गति मिल सकेगी।
