Lawrence Bishnoi का सिंडिकेट अब पारंपरिक गैंग्स से अलग एक डिसेंट्रलाइज्ड और टेक-ड्रिवन मॉडल पर काम कर रहा है। NIA की बढ़ती सख्ती और आपसी गुटबाजी के बीच यह संगठित अपराध अब देश की सुरक्षा और गवर्नेंस के लिए गंभीर चिंता का विषय बन गया है।
Lawrence Bishnoi का अपराध साम्राज्य अब पारंपरिक तौर-तरीकों को छोड़कर एक 'डिजिटल-फर्स्ट' ऑपरेशन की तरह काम कर रहा है। साबरमती सेंट्रल जेल के भीतर से यह गिरोह एनक्रिप्टेड कम्युनिकेशन और VoIP टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल कर रहा है, जो बिल्कुल किसी कॉर्पोरेट स्ट्रक्चर जैसा है। इस नेटवर्क में मीडिया मैनेजमेंट, लॉजिस्टिक्स और रिक्रूटमेंट के लिए अलग-अलग भूमिकाएं तय की गई हैं, जिससे जेल में बंद लीडरशिप के बावजूद सिंडिकेट का प्रभाव पूरे देश में बना हुआ है।
ऑपरेशंस का विस्तार
यह गिरोह अब स्थानीय स्तर का नहीं, बल्कि एक ट्रांस-नेशनल इकाई की तरह काम कर रहा है। सोशल मीडिया का इस्तेमाल करके नई भर्ती और अपने प्रभाव को साबित करने की रणनीति ने इन्हें मुंबई जैसे हाई-सिक्योरिटी इलाकों में भी सक्रिय कर दिया है। इनका फोकस हाई-प्रोफाइल लक्ष्यों पर है, ताकि अपने 'ब्रांड' का दबदबा कायम रखा जा सके।
आंतरिक अस्थिरता और कानूनी दबाव
फिलहाल यह सिंडिकेट एक नाजुक दौर से गुजर रहा है। Lawrence Bishnoi और Goldy Brar के बीच का पुराना गठबंधन टूट चुका है, जिसके चलते आपसी संघर्ष तेज हो गए हैं। चंडीगढ़ में हालिया हिंसा इस दरार का बड़ा प्रमाण है। वहीं, नेशनल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी (NIA) ने भी घेरा सख्त कर दिया है। Anmol Bishnoi जैसे प्रमुख नामों के डिपोर्टेशन से एजेंसी को नेटवर्क के बाकी इंटरनेशनल नोड्स को ट्रैक करने में मदद मिल रही है। हालांकि सिंडिकेट अभी भी सक्रिय है, लेकिन आंतरिक लड़ाई और सरकारी दबाव के कारण इसके विस्तार पर फिलहाल बड़ी रुकावटें आई हैं।
