Election Commission vs Ashok Lavasa: वोटर फॉर्म के नियमों पर छिड़ा विवाद, सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा मामला

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AuthorKaran Malhotra|Published at:
Election Commission vs Ashok Lavasa: वोटर फॉर्म के नियमों पर छिड़ा विवाद, सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा मामला

पूर्व चुनाव आयुक्त अशोक लवासा ने वोटर रजिस्ट्रेशन फॉर्म में बदलाव करने के चुनाव आयोग के अधिकार को चुनौती दी है। यह विवाद अब सुप्रीम कोर्ट पहुंच चुका है, जिससे आयोग के भीतर पारदर्शिता को लेकर सवाल उठ रहे हैं।

नियम बदलने के अधिकार पर सवाल

पूर्व चुनाव आयुक्त अशोक लवासा ने चुनाव आयोग की निर्णय लेने की प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठाए हैं। विवाद की जड़ 'फॉर्म 6' (वोटर रोल में नाम शामिल करने वाला फॉर्म) में बदलाव है। लवासा का तर्क है कि बिना किसी सरकारी या वैधानिक मंजूरी के चुनाव आयोग इन स्थापित प्रक्रियाओं को एकतरफा नहीं बदल सकता, क्योंकि ये नियम सीधे तौर पर मतदाताओं के अधिकारों से जुड़े हैं।

अंदरूनी कलह और सुप्रीम कोर्ट की नजर

यह मामला सिर्फ एक फॉर्म तक सीमित नहीं है। रिपोर्ट्स के अनुसार, दो वर्तमान चुनाव आयुक्त—सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी—ने भी आयोग के कई फैसलों पर असहमति जताई है। उनका आरोप है कि ये निर्णय उनकी जानकारी या सहमति के बिना लिए गए। इस अंदरूनी खींचतान को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग को उन फैसलों से जुड़े रिकॉर्ड पेश करने का निर्देश दिया है। हालांकि, कोर्ट ने अभी मुख्य चुनाव आयुक्त को निलंबित करने जैसा कोई अंतरिम आदेश नहीं दिया है।

पारदर्शिता और एल्गोरिदम का मुद्दा

विवाद का एक बड़ा हिस्सा 'स्पेशल इंटेंसिव रिविजन' प्रक्रिया है। इसमें वोटरों की पात्रता जांचने के लिए ऑटोमेटेड सिस्टम का इस्तेमाल किया जा रहा है। लवासा और अन्य विशेषज्ञों ने इन एल्गोरिदम की पारदर्शिता पर संदेह जताया है। डर यह है कि इन सिस्टमों के कारण योग्य मतदाताओं के नाम लिस्ट से बाहर हो सकते हैं और संबंधित अधिकारियों की वैधानिक शक्तियां प्रभावित हो सकती हैं।

गवर्नेंस पर असर

संवैधानिक संस्थाओं में स्थिरता निवेशकों और आम जनता के भरोसे के लिए अनिवार्य है। जब संस्थाओं के भीतर ही गवर्नेंस और पारदर्शिता पर सवाल उठते हैं, तो यह व्यवस्था में अनिश्चितता पैदा करता है। अब सभी की नजरें सुप्रीम कोर्ट की अगली सुनवाई पर हैं, जहां आयोग को अपनी प्रक्रियागत अनियमितताओं और अंदरूनी असहमति पर जवाब देना होगा।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.