Lavanya Jain: इंजीनियरिंग छोड़कर कमा रहे ₹95 लाख सालाना, डिग्री पर उठे सवाल

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AuthorAditya Rao|Published at:
Lavanya Jain: इंजीनियरिंग छोड़कर कमा रहे ₹95 लाख सालाना, डिग्री पर उठे सवाल

ग्रोथ मार्केटर Lavanya Jain ने यह कहकर नई बहस छेड़ दी है कि उन्होंने इंजीनियरिंग की पढ़ाई बीच में छोड़ने के बाद ₹95 लाख से ज़्यादा की सालाना कमाई की है। यह मामला आज के स्टार्टअप इकोसिस्टम में पारंपरिक डिग्री की अहमियत पर सवाल उठाता है।

डिग्री बनाम प्रैक्टिकल स्किल्स: नई बहस

भारत के प्रोफेशनल मार्केट में पारंपरिक कॉलेज डिग्रियों की ज़रूरत पर बहस एक बार फिर गरमा गई है। ग्रोथ मार्केटर Lavanya Jain, जिन्होंने अपना बैचलर ऑफ टेक्नोलॉजी प्रोग्राम फाइनल सेमेस्टर में छोड़ दिया था, उनका दावा है कि उनकी सालाना कमाई $100,000 (लगभग ₹95 लाख) से ज़्यादा है। उनका तर्क है कि उनकी प्रैक्टिकल बिज़नेस एक्सपिरियंस ने उन्हें डिग्री से कहीं ज़्यादा फायदा पहुंचाया है।

करियर और कमाई का स्ट्रक्चर

Lavanya Jain ने Runable, Kairos Computer और Fold जैसी कंपनियों में ग्रोथ और गो-टू-मार्केट स्ट्रेटेजी से जुड़े रोल्स पर काम किया है। उन्होंने अपनी इस शानदार कमाई का श्रेय अपने मुख्य कॉन्ट्रैक्टुअल काम और पांच अलग-अलग पैसिव इनकम सोर्सेस को दिया है। उन्होंने अपनी सैलरी क्रेडिट्स के डॉक्यूमेंट्स भी शेयर किए हैं, जो बताते हैं कि उनकी इनकम उनके पूर्व संस्थान के पीक प्लेसमेंट पैकेज से कहीं ज़्यादा है।

स्किल्स की अहमियत

Jain की दलील का मुख्य पॉइंट यह है कि इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (IIT) जैसे बड़े यूनिवर्सिटी ब्रांड्स सिर्फ 'करियर टैग' बनकर रह गए हैं, न कि सक्सेस के पक्के सूचक। उनका मानना है कि तेज़ी से बदलते स्टार्टअप वर्ल्ड में, प्रैक्टिकल बिज़नेस रिजल्ट्स और खास, डिमांड वाली स्किल्स को साबित करना ज़्यादा ज़रूरी हो गया है। उन्होंने यह भी बताया कि उन्होंने ऐसी टीमों को लीड किया है जिनमें टॉप-TIER इंजीनियरिंग स्कूलों के ग्रेजुएट्स भी शामिल थे, जिससे यह साबित होता है कि प्रोफेशनल सीनियरिटी सिर्फ एकेडमिक बैकग्राउंड से जुड़ी नहीं है।

मार्केट का बड़ा नज़रिया

इस घटना ने भारतीय जॉब मार्केट में एक बड़ा टेंशन दिखाया है - एक तरफ डिग्री-बेस्ड हायरिंग का पुराना तरीका, दूसरी तरफ स्पेशलाइज्ड, हैंड्स-ऑन एक्सपर्टाइज की बढ़ती डिमांड। हालांकि स्टार्टअप सेक्टर के कई प्रोफेशनल मेजरेबल इम्पेक्ट और स्किल-बेस्ड ग्रोथ पर फोकस करने को सपोर्ट करते हैं, वहीं आलोचक इसे 'आउटलायर' केस बता रहे हैं। कई इंडस्ट्री एक्सपर्ट्स का मानना है कि स्ट्रक्चर्ड करियर ग्रोथ, इंस्टीट्यूशनल ट्रेनिंग और कई स्थापित कंपनियों में एंट्री के लिए डिग्रियों का आज भी महत्व है।

मार्केट ऑब्ज़र्वर्स इस ट्रेंड पर बारीकी से नज़र रख रहे हैं ताकि टैलेंट एक्विजिशन में हो रहे बदलावों को समझा जा सके। कंपनियां अब ट्रेडिशनल डिग्री होल्डर्स की कॉस्ट और रिलायबिलिटी की तुलना स्किल-बेस्ड कॉन्ट्रैक्टर्स की एजिलिटी से कर रही हैं। मार्केट के लिए मुख्य बात यह है कि टेक्निकल डिग्रियां आज भी अपना इंस्टीट्यूशनल वैल्यू रखती हैं, लेकिन डिजिटल और ग्रोथ रोल्स में प्रैक्टिकल स्किल्स और परफॉरमेंस को ज़्यादा प्रीमियम मिल रहा है।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.