Laser Power & Infra IPO: दूसरे दिन सिर्फ 23% सब्सक्रिप्शन, क्या है वजह?

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AuthorAditya Rao|Published at:
Laser Power & Infra IPO: दूसरे दिन सिर्फ 23% सब्सक्रिप्शन, क्या है वजह?

Laser Power & Infra के IPO में निवेशकों की रुचि अभी भी धीमी है। दूसरे दिन शाम तक केवल **23%** शेयरों के लिए बोलियां आईं। कंपनी इस इश्यू से **₹742 करोड़** जुटा रही है, जिसका मुख्य उद्देश्य अपने भारी कर्ज को कम करना है।

IPO में धीमी रफ्तार

Laser Power & Infra, जो पावर ट्रांसमिशन उपकरण बनाने वाली कंपनी है, के इनिशियल पब्लिक ऑफरिंग (IPO) में उम्मीद के मुताबिक भीड़ नहीं दिख रही है। 10 जुलाई की सुबह तक, कंपनी ने कुल पेश किए गए शेयरों का 23% ही सब्सक्राइब किया है। यह इश्यू रिटेल और संस्थागत निवेशकों के लिए 13 जुलाई तक खुला रहेगा।

निवेशकों का रुझान

अलग-अलग निवेशक वर्गों में प्रतिक्रिया मिली-जुली रही है। नॉन-इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टर्स (जिनमें हाई नेट-वर्थ इंडिविजुअल्स और कॉर्पोरेट बॉडी शामिल हैं) ने अपने हिस्से का 34% सब्सक्राइब किया है, जो सबसे ज्यादा है। वहीं, रिटेल इंडिविजुअल इन्वेस्टर्स ने अपने कोटे का 31% ही खरीदा है। पावर सेक्टर की अन्य कंपनियों के IPO के मुकाबले यह रफ्तार धीमी मानी जा रही है।

IPO का स्ट्रक्चर और लक्ष्य

कंपनी ने अपने शेयर का प्राइस बैंड ₹203 से ₹214 के बीच रखा है। इस IPO के जरिए कंपनी फ्रेश इश्यू से ₹542 करोड़ और प्रमोटरों द्वारा ऑफर-फॉर-सेल (OFS) से ₹200 करोड़ जुटाएगी, यानी कुल ₹742 करोड़। यह रकम पहले ₹1,200 करोड़ जुटाने की योजना से कम है। फ्रेश इश्यू से जुटाई गई रकम में से ₹499 करोड़ का इस्तेमाल मौजूदा कर्ज को चुकाने या प्री-पेमेंट के लिए किया जाएगा। जून 2026 तक कंपनी पर कुल ₹935.7 करोड़ का कर्ज था।

कंपनी का फाइनेंशियल परफॉर्मेंस और रिस्क

मार्च 2026 को समाप्त हुए फाइनेंशियल ईयर में, कंपनी के ऑपरेशन से रेवेन्यू 9.5% घटकर ₹2,326.1 करोड़ रह गया था। हालांकि, कंपनी के नेट प्रॉफिट (Profit after tax) में 42% का जबरदस्त उछाल देखा गया और यह ₹151.6 करोड़ पर पहुंच गया। इसका मुख्य कारण ऑपरेटिंग मार्जिन का 12.96% तक सुधरना रहा, जो पिछले साल 9.74% था।

निवेशकों को कंपनी के बिजनेस मॉडल से जुड़े कुछ रिस्क पर भी ध्यान देना चाहिए। कंपनी का बिजनेस कुछ बड़े क्लाइंट्स पर काफी निर्भर करता है (High Customer Concentration)। इसके अलावा, कुछ खास प्रोडक्ट्स और सीमित सप्लायर्स पर निर्भरता सप्लाई चेन में रुकावट और कमोडिटी कीमतों में उतार-चढ़ाव के प्रति संवेदनशील बनाती है। ये फैक्टर, पावर ट्रांसमिशन उपकरण सेक्टर की कड़ी प्रतिस्पर्धा के साथ, निवेशकों के लिए महत्वपूर्ण हैं।

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