Laser Power & Infra का ₹742 करोड़ का IPO 13 जुलाई को बंद हो गया, जिसमें कुल मिलाकर 2.5 गुना सब्सक्रिप्शन मिला। नॉन-इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टर्स (NIIs) की तरफ से जबरदस्त मांग देखी गई। कंपनी IPO से मिले पैसों का इस्तेमाल मुख्य रूप से अपने कर्ज को कम करने के लिए करेगी। निवेशकों को कंपनी की हालिया परफॉरमेंस पर भी ध्यान देना चाहिए, जिसमें नेट प्रॉफिट बढ़ने के बावजूद रेवेन्यू में गिरावट दर्ज की गई थी।
IPO में निवेशकों का कैसा रहा रुझान?
Laser Power & Infra ने 13 जुलाई, 2026 को अपना इनिशियल पब्लिक ऑफरिंग (IPO) सफलतापूर्वक बंद किया। कंपनी ने 2.55 करोड़ शेयरों के मुकाबले 6.62 करोड़ शेयरों के लिए बोलियां प्राप्त कीं। इस तरह, IPO का फाइनल सब्सक्रिप्शन लेवल लगभग 2.5 गुना रहा।
खासकर, नॉन-इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टर्स (NIIs) कैटेगरी में जबरदस्त मांग देखी गई, जहाँ 7.22 गुना से ज़्यादा सब्सक्रिप्शन मिला। वहीं, रिटेल इन्वेस्टर्स ने अपने हिस्से का 1.71 गुना सब्सक्रिप्शन हासिल किया।
कर्ज घटाने की योजना और वित्तीय नतीजें
कुल ₹742 करोड़ के इस IPO में फ्रेश इश्यू और ऑफर-फॉर-सेल (OFS) का मिश्रण शामिल है। कंपनी का इरादा फ्रेश इश्यू से जुटाए गए ₹542 करोड़ का इस्तेमाल मुख्य रूप से अपने मौजूदा कर्ज को चुकाने (prepay borrowings) के लिए करना है। 17 जून, 2026 तक, कंपनी पर ₹935.7 करोड़ का बकाया कर्ज था। इस कर्ज को कम करना कंपनी का एक बड़ा लक्ष्य है, जिससे भविष्य की तिमाहियों में ब्याज लागत (interest costs) कम हो सकती है और बैलेंस शीट की मजबूती बढ़ सकती है।
अगर वित्तीय प्रदर्शन की बात करें, तो कंपनी ने मार्च 2026 में समाप्त हुए फाइनेंशियल ईयर के लिए ₹2,326.1 करोड़ का रेवेन्यू दर्ज किया, जो पिछले साल की तुलना में 9.5% कम है। हालांकि, इसके बावजूद, कंपनी ने प्रॉफिट आफ्टर टैक्स (PAT) में 42% की वृद्धि दर्ज की और यह ₹151.6 करोड़ रहा। टॉप-लाइन रेवेन्यू में गिरावट के बावजूद बॉटम-लाइन प्रॉफिट में यह बढ़ोतरी, साल भर में ऑपरेटिंग एफिशिएंसी में सुधार को दर्शाती है।
कंपनी का बिजनेस और सेक्टर की चाल
कोलकाता स्थित Laser Power & Infra, जिसकी स्थापना 1988 में हुई थी, पश्चिम बंगाल में तीन मैन्युफैक्चरिंग यूनिट्स चलाती है। कंपनी का बिजनेस दो मुख्य सेगमेंट में बंटा हुआ है: मैन्युफैक्चरिंग, जो इसके रेवेन्यू का 73% हिस्सा है, और इंजीनियरिंग, प्रोक्योरमेंट और कंस्ट्रक्शन (EPC) प्रोजेक्ट्स, जो बाकी 27% का योगदान करते हैं।
हालांकि कंपनी की पूर्वी भारत के पावर केबल मार्केट में अच्छी पकड़ है, निवेशकों को कुछ खास बिजनेस जोखिमों से भी अवगत रहना चाहिए। कंपनी को कस्टमर कंसंट्रेशन रिस्क का सामना करना पड़ता है, जिसका मतलब है कि इसका महत्वपूर्ण रेवेन्यू कुछ ही ग्राहकों पर निर्भर हो सकता है। इसके अलावा, यह बिजनेस कच्चे माल की कीमतों में उतार-चढ़ाव के प्रति संवेदनशील है, खासकर कॉपर और एल्युमीनियम, जो केबल मैन्युफैक्चरिंग के लिए जरूरी हैं। इन कमोडिटी कीमतों में कोई भी बढ़ोतरी सीधे प्रॉफिट मार्जिन को प्रभावित कर सकती है। कुछ बड़े और विविध साथियों के विपरीत, कंपनी का क्षेत्रीय फोकस और प्रोजेक्ट-आधारित EPC रेवेन्यू मॉडल वर्किंग कैपिटल साइकिल को प्रभावी ढंग से मैनेज करने के लिए लगातार निष्पादन (consistent execution) की मांग करते हैं। शेयरधारकों के लिए अगला बड़ा अपडेट स्टॉक एक्सचेंजों पर शेयरों की लिस्टिंग और कर्ज घटाने की प्रगति व ऑर्डर बुक एग्जीक्यूशन पर अगली तिमाही के अपडेट्स होंगे।
