प्रधानमंत्री आवास के पास स्थित एक ऐतिहासिक मस्जिद को लेकर Land and Development Office (L&DO) ने खाली करने का नोटिस जारी किया है। विवाद इस बात पर है कि क्या यह जमीन सरकारी है या 1977 के गजट के तहत संरक्षित वक्फ संपत्ति।
विवाद की जड़ क्या है?
L&DO ने 19 अक्टूबर को यह नोटिस जारी किया है, जिसमें जगह को 6 दिन के भीतर खाली करने का आदेश दिया गया है। सरकारी महकमे का दावा है कि यह जमीन बिना अनुमति के इस्तेमाल की जा रही है और यह पूरी तरह से सरकारी संपत्ति है। वहीं, याचिकाकर्ताओं का कहना है कि यह जमीन 1977 के दिल्ली गजट और New Delhi Municipal Council के रिकॉर्ड में एक संरक्षित वक्फ संपत्ति के रूप में दर्ज है, जो इसे किसी भी सामान्य बेदखली प्रक्रिया से सुरक्षा प्रदान करती है।
खाली कुर्सी का संकट
इस पूरे मामले में एक बड़ी चुनौती यह भी है कि Delhi Waqf Board में 2023 से कोई बोर्ड ही नहीं है। प्रशासनिक ढांचे में इस खालीपन के कारण कोई भी संस्थागत जवाब नहीं दिया गया, जिससे विवाद और गहरा गया है।
सरकार के पास पहुंची अर्जी
मामले की गंभीरता को देखते हुए Jamiat Ulama-i-Hind के प्रतिनिधिमंडल ने केंद्रीय अल्पसंख्यक कार्य मंत्री किरेन रिजिजू से मुलाकात की है। उन्होंने मांग की है कि जब तक जमीन के कानूनी टाइटल और हेरिटेज स्टेटस की जांच पूरी नहीं हो जाती, तब तक किसी भी तरह की तोड़फोड़ पर रोक लगाई जाए। मंत्री ने फिलहाल दस्तावेजों की समीक्षा करने का आश्वासन दिया है।
