Lancet Countdown की नई रिपोर्ट में भारत को हीटवेव का ग्लोबल हॉटस्पॉट बताया गया है। साल 2025 में रिकॉर्ड हीट एक्सपोजर दर्ज किया गया, जो हेल्थकेयर, इंश्योरेंस और इंफ्रास्ट्रक्चर जैसे सेक्टर्स के लिए लंबी अवधि के वित्तीय संकेत दे रहा है।
सेहत के साथ इकोनॉमी पर मार
Lancet Countdown की रिपोर्ट के अनुसार, 2025 का साल हीटवेव के मामले में अब तक का दूसरा सबसे बुरा वर्ष रहा है। डेटा के मुताबिक, भारत में बुजुर्गों ने औसतन 12.8 हीटवेव दिन और शिशुओं ने 8.7 दिन भीषण गर्मी का सामना किया है। यह न केवल सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए चिंता का विषय है, बल्कि भारतीय कॉर्पोरेट जगत के लिए भी बड़े बदलावों का संकेत है।
किन सेक्टर्स पर होगी हलचल?
- इंश्योरेंस सेक्टर: गर्मी से जुड़ी बीमारियों में बढ़त से क्लेम की संख्या बढ़ सकती है, जिससे कंपनियां भविष्य में प्रीमियम दरों को फिर से तय करने पर मजबूर हो सकती हैं।
- हेल्थकेयर: मेडिकल इंफ्रास्ट्रक्चर और सेवाओं की बढ़ती मांग के चलते अस्पतालों को अपनी क्षमताओं में भारी निवेश करना होगा।
- इंफ्रास्ट्रक्चर और रियल एस्टेट: अब 'कूल' बिल्डिंग सॉल्यूशंस, बेहतर इंसुलेशन और क्लाइमेट-रेजिलिएंट शहरी प्लानिंग की मांग तेजी से बढ़ेगी। इसका सीधा असर निर्माण सामग्री और आर्किटेक्चरल डिजाइन पर पड़ेगा।
- पावर और यूटिलिटी: कूलिंग की बढ़ती मांग के कारण बिजली ग्रिड पर दबाव बढ़ेगा, जिससे एनर्जी-एफिशिएंट कूलिंग अप्लायंसेज बनाने वाली कंपनियों के लिए नए अवसर पैदा होंगे।
निवेशकों के लिए क्या है सीख?
रिपोर्ट इस बात पर जोर देती है कि क्लाइमेट फाइनेंस में सुधार की जरूरत है। अगर सरकारें और ग्लोबल संस्थाएं लोन के बजाय ग्रांट्स पर ध्यान देती हैं, तो इसका असर पब्लिक स्पेंडिंग और फिस्कल प्रायोरिटीज पर पड़ेगा। निवेशकों को अब कंपनियों के ESG फ्रेमवर्क को गहराई से देखना होगा। कंपनियां जलवायु जोखिमों से निपटने के लिए क्या 'बिजनेस कंटिन्यूटी प्लान' अपना रही हैं, यह उनके ऑपरेटिंग मार्जिन और कैपिटल एक्सपेंडिचर पर बड़ा असर डालेगा।
