Ladakh Governance Talks: केंद्र और लद्दाख के बीच बातचीत बेनतीजा, अब 22 अक्टूबर को होगा मंथन

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AuthorSaanvi Reddy|Published at:
Ladakh Governance Talks: केंद्र और लद्दाख के बीच बातचीत बेनतीजा, अब 22 अक्टूबर को होगा मंथन

केंद्रीय गृह मंत्रालय और लद्दाख के प्रतिनिधि मंडलों, लेह एपेक्स बॉडी (LAB) और करगिल डेमोक्रेटिक एलायंस (KDA), के बीच पांचवें दौर की बातचीत बिना किसी समझौते के समाप्त हो गई है।

लद्दाख के प्रशासनिक ढांचे और संवैधानिक सुरक्षा को लेकर चल रही बातचीत का पांचवां दौर गुरुवार को बेनतीजा रहा। लेह में हुई इस हाई-प्रोफाइल बैठक में केंद्र सरकार ने क्षेत्र के गवर्नेंस के लिए एक वैचारिक ढांचा पेश किया, जिसे स्थानीय प्रतिनिधियों ने खारिज कर दिया। उनका कहना है कि यह प्रस्ताव लद्दाख की जरूरतों को पूरा करने में नाकाफी है।

असली पेच क्या है?

प्रतिनिधि मंडल की मुख्य मांग राज्य में चुनी हुई गवर्नेंस व्यवस्था और संविधान के आर्टिकल 371 के समान संवैधानिक सुरक्षा पाने की है। ये मांगें लद्दाख की पहचान और क्षेत्रीय स्वायत्तता के लिए अहम मानी जा रही हैं।

अब आगे क्या होगा?

बातचीत के रास्ते खुले हैं। सरकार ने शुक्रवार सुबह तक एक विस्तृत ड्राफ्ट प्रस्ताव सौंपने का वादा किया है। इस ड्राफ्ट का अध्ययन कानूनी विशेषज्ञों की मदद से किया जाएगा। इसके बाद, उप-समिति ने नई दिल्ली में 22 अक्टूबर को फिर से बैठक करने का प्रस्ताव रखा है। सोनम वांगचुक जैसे कार्यकर्ताओं ने शुरुआती नतीजों पर निराशा जताई है, लेकिन अंतिम फैसला सरकार के लिखित प्रस्ताव के बाद ही लिया जाएगा।

क्षेत्रीय संप्रभुता पर स्टैंड

गवर्नेंस के मुद्दों के अलावा, लेह एपेक्स बॉडी ने चीन के विदेश मंत्रालय द्वारा पश्चिमी लद्दाख पर किए गए दावों को सिरे से खारिज कर दिया। लेह एपेक्स बॉडी के सह-अध्यक्ष चेरिंग दोरजे लारूक ने स्पष्ट किया कि लद्दाख हमेशा से भारत का अभिन्न हिस्सा रहा है और किसी भी विदेशी हस्तक्षेप को स्वीकार नहीं किया जाएगा।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.