LIC के नतीजे: प्रॉफिट में 16.68% की छलांग! AUM पहुंचा ₹59 लाख करोड़ के पार

OTHER
Whalesbook Logo
AuthorMehul Desai|Published at:
LIC के नतीजे: प्रॉफिट में 16.68% की छलांग! AUM पहुंचा ₹59 लाख करोड़ के पार
Overview

सरकारी बीमा कंपनी LIC (Life Insurance Corporation of India) के निवेशकों के लिए अच्छी खबर है। कंपनी ने 9 महीनों के नतीजों में अपने प्रॉफिट आफ्टर टैक्स (PAT) में **16.68%** का शानदार इजाफा दर्ज किया है। यह PAT बढ़कर **₹33,998 करोड़** पर पहुंच गया है। कंपनी के वैल्यू ऑफ न्यू बिजनेस (VNB) में भी **27.96%** की ज़बरदस्त ग्रोथ देखी गई है, जबकि एसेट्स अंडर मैनेजमेंट (AUM) **₹59.17 लाख करोड़** को पार कर गया है।

LIC का दमदार परफॉरमेंस: मुनाफे में आई बम्पर तेजी

सरकारी दिग्गज LIC ने 31 दिसंबर 2025 को खत्म हुई 9 महीने की अवधि के लिए अपने शानदार फाइनेंशियल नतीजे पेश किए हैं। कंपनी के प्रॉफिट आफ्टर टैक्स (PAT) में पिछले साल की इसी अवधि की तुलना में 16.68% की जोरदार बढ़ोतरी हुई है, जो ₹29,138 करोड़ से बढ़कर ₹33,998 करोड़ पर पहुंच गया है। इस शानदार ग्रोथ की मुख्य वजह वैल्यू ऑफ न्यू बिजनेस (VNB) में 27.96% का उछाल है, जो ₹8,288 करोड़ पर रहा।

नंबर्स क्या कहते हैं?

  • PAT: 9 महीने में ₹33,998 करोड़ (FY26) बनाम ₹29,138 करोड़ (FY25) - 16.68% YoY की बढ़ोतरी
  • टोटल प्रीमियम इनकम: ₹3,71,293 करोड़ (9M FY26) - 9.02% YoY की बढ़त
  • VNB: ₹8,288 करोड़ (9M FY26) - 27.96% YoY की ग्रोथ
  • नेट VNB मार्जिन: 18.8% (9M FY26) बनाम 17.1% (9M FY25) - 170 bps YoY का सुधार
  • नॉन-पैर APE (इंडिविजुअल): ₹10,045 करोड़ (9M FY26) - 47.44% YoY की तेजी
  • ओवरऑल एक्सपेंस रेश्यो: 11.65% (9M FY26) - 132 bps YoY की कमी
  • AUM: ₹59,16,680 करोड़ (31 Dec 2025) - 8.01% YoY की बढ़त
  • सॉल्वेंसी रेश्यो: 2.19 (31 Dec 2025) बनाम 2.02 (31 Dec 2024)

स्ट्रैटेजी का दिखा असर

LIC की बेहतर प्रॉफिटेबिलिटी के पीछे कंपनी की हाई-मार्जिन नॉन-पैर प्रोडक्ट्स की ओर स्ट्रैटेजिक शिफ्ट साफ दिख रही है। इंडिविजुअल बिजनेस सेगमेंट में नॉन-पैर एनुअल प्रीमियम इक्विवेलेंट (APE) 47.44% की भारी बढ़ोतरी के साथ ₹10,045 करोड़ पर पहुंच गया। इसने कुल इंडिविजुअल APE में कंपनी की हिस्सेदारी बढ़ाकर 36.46% कर दी है, जो पिछले साल 27.68% थी। इस प्रोडक्ट मिक्स के ऑप्टिमाइजेशन से नेट VNB मार्जिन में 170 बेसिस पॉइंट्स का सुधार हुआ और यह अब 18.8% पर है।

ऑपरेशनल एफिशिएंसी ने भी अहम भूमिका निभाई, जिसमें ओवरऑल एक्सपेंस रेश्यो 132 बेसिस पॉइंट्स घटकर 11.65% पर आ गया। साथ ही, एसेट्स अंडर मैनेजमेंट (AUM) में 8.01% की बढ़ोतरी के साथ यह ₹59.17 लाख करोड़ तक पहुंच गया, जो निवेशकों का भरोसा और मार्केट में कंपनी की पकड़ दिखाता है। सॉल्वेंसी रेश्यो सुधरकर 2.19 हो गया है, जिसने कंपनी के फाइनेंशियल बफर को मजबूत किया है।

कुछ चिंताएं और भविष्य का रास्ता

हालांकि, फाइनेंशियल मेट्रिक्स मजबूत हैं, लेकिन रिपोर्ट में इंडिविजुअल पॉलिसी की बिक्री में 0.40% की मामूली कमी का भी जिक्र है। इसके अलावा, पर्सिस्टेंसी रेश्यो में भी थोड़ी गिरावट आई है और फर्स्ट ईयर प्रीमियम इनकम के आधार पर ओवरऑल मार्केट शेयर में मामूली कमी देखी गई है। एक अहम बात यह भी है कि कंपनी ने आगे के लिए कोई फाइनेंशियल गाइडेंस नहीं दिया है, जिससे एनालिस्ट्स को मौजूदा ट्रेंड्स और स्ट्रैटेजिक पहलों के आधार पर ही भविष्य का अंदाजा लगाना होगा।

नॉन-पैर प्रोडक्ट्स की ओर बढ़ना LIC के लिए ग्रोथ का एक स्पष्ट रास्ता दिखाता है, लेकिन मार्केट शेयर बनाए रखना और पर्सिस्टेंसी रेश्यो में सुधार करना प्रमुख चुनौतियां होंगी। मैनेजमेंट ग्रामीण इलाकों में 'बीमा सखी योजना' जैसी पहलों के जरिए अपनी पहुंच बढ़ाने पर फोकस कर रहा है, जो महिलाओं को एजेंट के तौर पर नियुक्त कर रही है। यह लॉन्ग-टर्म में वॉल्यूम ग्रोथ के लिए एक बड़ा बूस्ट दे सकता है। निवेशक इस पर कड़ी नजर रखेंगे कि LIC कैसे अपनी विशालता और प्रोडक्ट डाइवर्सिफिकेशन का फायदा उठाकर ऑपरेशनल चुनौतियों को पार कर 'इंश्योरेंस फॉर ऑल बाय 2047' के विजन को साकार करती है।

Disclaimer:This content is for educational and informational purposes only and does not constitute investment, financial, or trading advice, nor a recommendation to buy or sell any securities. Readers should consult a SEBI-registered advisor before making investment decisions, as markets involve risk and past performance does not guarantee future results. The publisher and authors accept no liability for any losses. Some content may be AI-generated and may contain errors; accuracy and completeness are not guaranteed. Views expressed do not reflect the publication’s editorial stance.