LIC का बढ़ता भरोसा
देश की सबसे बड़ी संस्थागत निवेशक, Life Insurance Corporation of India (LIC) ने फार्मा सेक्टर की दिग्गज कंपनी Cipla Limited में अपनी हिस्सेदारी को खासी बढ़ा दी है। 17 जुलाई 2025 से 27 नवंबर 2025 के बीच, LIC ने ओपन मार्केट से करीब 1.64 करोड़ शेयर खरीदे हैं। इस खरीदारी के बाद Cipla में LIC की हिस्सेदारी 5.025% से बढ़कर 7.055% हो गई है, जो कि 2.03% का इजाफा है। यह ट्रांजैक्शन सेबी (SEBI) के नियमों के तहत किए गए हैं।
आंकड़ों पर एक नजर:
- पिछली हिस्सेदारी: 5.025% (लगभग 4.06 करोड़ शेयर)
- नई हिस्सेदारी: 7.055% (लगभग 5.70 करोड़ शेयर)
- खरीदे गए शेयर: लगभग 1.64 करोड़ शेयर
- खरीदारी की अवधि: 17 जुलाई 2025 - 27 नवंबर 2025
यह बड़ी खरीदारी ऐसे समय में हुई है जब Cipla के शेयर में कुछ दबाव देखा जा रहा है। हालांकि, यह माना जा रहा है कि LIC ने Cipla के शेयरों में आई गिरावट का फायदा उठाकर निवेश किया है।
LIC का पिछला दांव और वर्तमान विश्वास
LIC का Cipla में निवेश का यह कदम उसके पिछले रुख से अलग है। लगभग एक दशक पहले, August 2012 और January 2013 के बीच, LIC ने Cipla में अपनी हिस्सेदारी 8.34% से घटाकर 6.21% कर दी थी, जिसमें उसने ₹665.39 करोड़ के शेयर बेचे थे। लेकिन अब, बढ़ी हुई हिस्सेदारी यह दर्शाती है कि LIC को Cipla की लॉन्ग-टर्म संभावनाओं पर पहले से कहीं ज्यादा भरोसा है।
Cipla के सामने चुनौतियां और प्रदर्शन
भारतीय फार्मा सेक्टर में एक प्रमुख कंपनी के तौर पर Cipla एक जटिल माहौल से गुजर रही है। वित्तीय वर्ष 2026 की दूसरी तिमाही में कंपनी का नेट प्रॉफिट 4% बढ़कर ₹1,351 करोड़ रहा था, जबकि रेवेन्यू 8% बढ़कर ₹7,589 करोड़ हुआ था। हालांकि, तीसरी तिमाही में कंपनी के प्रदर्शन में भारी गिरावट देखी गई, जहां नेट प्रॉफिट 57% घटकर ₹676 करोड़ रह गया। इसका मुख्य कारण North America में gRevlimid की बिक्री में आई कमी बताया जा रहा है।
इसके अलावा, gRevlimid जैसे मुख्य प्रोडक्ट के फेज-आउट होने के कारण EBITDA मार्जिन पर भी दबाव देखा जा रहा है, और FY26 व FY27 में इसमें और गिरावट का अनुमान है।
कंपनी की पकड़ और आगे का रास्ता
इन चुनौतियों के बावजूद, Cipla रेस्पिरेटरी सेगमेंट में अपनी लीडरशिप बनाए हुए है और Foracort ब्रांड के साथ वह #1 पोजीशन पर है। भारतीय बाजार में कंपनी की पकड़ मजबूत है और वह डबल-डिजिट ग्रोथ दिखा रही है। कंपनी को Afrezza, एक इन्हेल्ड इंसुलिन, के लिए भी मंजूरी मिल चुकी है और वह भविष्य में ग्रोथ के लिए नए प्रोडक्ट्स लॉन्च करने पर फोकस कर रही है।
रिस्क और आउटलुक
Cipla को US में प्राइसिंग प्रेशर, जेनेरिक कॉम्पिटिशन और प्रोडक्ट लाइफसाइकिल में बदलाव, खासकर gRevlimid की घटती बिक्री जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। कुछ एनालिस्टों ने भी स्टॉक को लेकर सावधानी जताई है। उदाहरण के लिए, MarketsMOJO ने हाल के प्रदर्शन और वैल्यूएशन को देखते हुए Cipla को 'Hold' से 'Sell' रेटिंग दी है। स्टॉक ने पिछले एक साल में -7.93% का रिटर्न दिया है, जबकि Sensex ने पॉजिटिव रिटर्न दिखाया है। आने वाले समय में EBITDA मार्जिन में गिरावट की आशंका के चलते कंपनी को कॉस्ट ऑप्टिमाइजेशन और ऑपरेशनल एफिशिएंसी पर खास ध्यान देना होगा।
पीयर कंपेरिजन
भारतीय फार्मा सेक्टर में ओवरऑल अच्छी ग्रोथ देखी जा रही है, Nifty Pharma इंडेक्स में भी तेजी है। Lupin, Biocon, और Torrent Pharmaceuticals जैसी कंपनियां उभरते थेरेपी एरिया और बायोसिमिलर्स का फायदा उठा रही हैं। Sun Pharma, Dr. Reddy's Laboratories, और Divi's Laboratories भी प्रमुख कंपटीटर हैं। Cipla रेस्पिरेटरी थेरेपी में भले ही लीडर हो, लेकिन अन्य सेगमेंट में Glenmark और USV जैसी कंपनियों से उसे टक्कर मिल रही है। पूरे सेक्टर के लिए US प्राइसिंग प्रेशर और तीव्र प्रतिस्पर्धा प्रमुख चुनौतियां बनी हुई हैं।