Kymore का स्वास्थ्य संकट: 10 लाख टन एस्बेस्टस कचरे के बीच जीने को मजबूर स्थानीय लोग

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AuthorNeha Patil|Published at:
Kymore का स्वास्थ्य संकट: 10 लाख टन एस्बेस्टस कचरे के बीच जीने को मजबूर स्थानीय लोग

मध्य प्रदेश के Kymore में Turner & Newall फैक्ट्री के बंद होने के दशकों बाद भी वहां **10 लाख टन** जहरीला एस्बेस्टस कचरा फैला है। यह पर्यावरण और स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा बन चुका है।

मध्य प्रदेश के Kymore शहर में इस वक्त एक बड़ा पर्यावरण और स्वास्थ्य संकट गहरा गया है। यूके स्थित कंपनी Turner & Newall की पुरानी यूनिट के बंद होने के बाद वहां करीब 10 लाख टन एस्बेस्टस का कचरा रिहायशी इलाकों, खुले मैदानों और स्कूलों के खेल के मैदानों में बिखरा हुआ है, जो स्थानीय निवासियों के लिए मौत का जाल बन गया है।

स्वास्थ्य पर गहरा असर

मेडिकल एक्सपर्ट्स ने इस प्रदूषण के लंबे समय तक रहने वाले घातक प्रभावों पर चिंता जताई है। डॉक्टरों का कहना है कि वहां के निवासियों में 'एस्बेस्टोसिस' (Asbestosis) के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं, जो एक लाइलाज फेफड़ों की बीमारी है। रिपोर्टों के अनुसार, जो लोग बचपन में इसके संपर्क में आए थे, उनमें अब फेफड़ों का कैंसर और गंभीर श्वसन संबंधी समस्याएं (Respiratory distress) देखी जा रही हैं।

कॉर्पोरेट लापरवाही का इतिहास

1970 के दशक के अभिलेखों से पता चलता है कि कंपनी का मैनेजमेंट एस्बेस्टस के खतरों से पूरी तरह वाकिफ था। तब भी, कंपनी के एक डॉक्टर ने सख्त सुरक्षा मानकों को लागू करने की सलाह दी थी, जिसे मैनेजमेंट ने नजरअंदाज कर दिया। साल 2001 में कंपनी के दिवालिया होने के बाद यह कचरा वहीं का वहीं छोड़ दिया गया, जिसकी सफाई के लिए कोई प्रभावी कदम नहीं उठाया गया।

ESG का सबक

निवेशकों और बाजार के जानकारों के लिए, Kymore की यह स्थिति ESG (एनवायर्नमेंटल, सोशल एंड गवर्नेंस) मानकों के पालन का एक कड़ा सबक है। यह दिखाता है कि कैसे खराब गवर्नेंस के चलते कंपनी के अस्तित्व खत्म होने के दशकों बाद भी बड़ी देनदारियां और मानवीय संकट बने रह सकते हैं। फिलहाल ब्रिटिश सरकार ने भी इस मामले पर चिंता जताई है और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जवाबदेही की मांग उठ रही है।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.