Aditya Birla Group के चेयरमैन कुमार मंगलम बिड़ला ने एक बार फिर दोहराया है कि असली बिजनेस सक्सेस तिमाही नतीजों (Quarterly Results) पर नहीं, बल्कि लंबी अवधि की सोच पर निर्भर करती है। उन्होंने ग्रुप की स्ट्रैटेजिक एक्विजिशन (Strategic Acquisitions) और बड़े पैमाने पर मैन्युफैक्चरिंग पर जोर देने की बात कही, जिससे ग्लोबल लीडरशिप हासिल की जा सके।
Detailed Coverage
लंबी अवधि की सोच क्यों जरूरी?
चेन्नई में मद्रास चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री की 190वीं एनुअल जनरल मीटिंग में कुमार मंगलम बिड़ला ने टिकाऊ बिजनेस बनाने के अपने विचार साझा किए। उन्होंने कहा कि सिर्फ तिमाही नतीजों पर फोकस करना काफी सीमित हो सकता है, जबकि एक दशक या उससे ज्यादा लंबी रणनीतिक चालें ही इंडस्ट्री लीडर्स को परिभाषित करती हैं।
स्ट्रैटेजिक एक्विजिशन और स्केल का महत्व
बिड़ला ने 2007 में हिंडाल्को इंडस्ट्रीज (Hindalco Industries) द्वारा नोवेलिस (Novelis) के अधिग्रहण का जिक्र किया। उस समय बाजार को इस डील पर शक था, लेकिन इसी लंबी अवधि के निवेश ने हिंडाल्को को वैल्यू-एडेड एल्युमीनियम सेक्टर में ग्लोबल लीडर बनने में मदद की। उन्होंने जोर दिया कि भले ही बाजार का सेंटिमेंट तुरंत निगेटिव हो, अपने विजन पर यकीन रखना बहुत जरूरी है।
उन्होंने मॉडर्न मैन्युफैक्चरिंग में स्केल (Scale) यानी बड़े पैमाने के उत्पादन के महत्व पर भी बात की। अल्ट्राटेक सीमेंट (UltraTech Cement) का उदाहरण देते हुए उन्होंने बताया कि कैसे कंपनी 200 मिलियन टन से ज्यादा की क्षमता तक पहुंची। बिड़ला के अनुसार, इतना बड़ा स्केल इंडस्ट्री की इकोनॉमिक्स को बदल देता है, जिससे बेहतर टेक्नोलॉजी पार्टनर, सप्लायर और कैपिटल आकर्षित होते हैं और एक मजबूत बिजनेस मॉडल तैयार होता है।
आर्थिक दबावों से निपटना
मैक्रोइकॉनॉमिक चुनौतियों से निपटने के बारे में पूछे जाने पर बिड़ला ने कहा कि ग्रुप का डाइवर्सिफाइड ग्लोबल फुटप्रिंट किसी एक रीजन की अस्थिरता से बचाता है। ईंधन जैसी बढ़ती ऑपरेशनल कॉस्ट (Operational Costs) से निपटने के लिए ग्रुप ने अपने पुराने सप्लायर रिश्तों का फायदा उठाया है और जरूरत पड़ने पर ग्राहकों के लिए कीमतों को एडजस्ट किया है। निवेशक अक्सर देखते हैं कि बड़ी कंपनियां इन लागतों को कैसे मैनेज करती हैं, क्योंकि ये महंगाई के दौर में उनके ऑपरेटिंग मार्जिन को सीधे प्रभावित करती हैं।
भारत का मैन्युफैक्चरिंग आउटलुक
बिड़ला ने भारत की ग्लोबल मैन्युफैक्चरिंग हब बनने की क्षमता को लेकर आशावाद व्यक्त किया। हालांकि उन्होंने माना कि यह सेक्टर अभी अपनी पूरी क्षमता तक नहीं पहुंचा है, लेकिन उन्होंने कहा कि निवेश के लिए माहौल लगातार अनुकूल होता जा रहा है। उन्होंने इंडस्ट्री को क्षमता बढ़ाने और स्किल्स विकसित करने पर ध्यान केंद्रित करने के लिए प्रोत्साहित किया, क्योंकि अब मैन्युफैक्चरिंग में बड़े बदलाव के लिए जरूरी स्थितियां मौजूद हैं।
संगठनात्मक विकास
फाइनेंशियल और ऑपरेशनल स्ट्रैटेजी के अलावा, बिड़ला ने बदलती दुनिया में एक पुरानी संस्था का नेतृत्व करने की चुनौती पर भी बात की। उन्होंने कहा कि ग्रुप अपने मैनेजमेंट कल्चर को GenZ वर्कफोर्स की वैल्यूज और पर्पस-ड्रिवेन माइंडसेट के साथ बेहतर ढंग से अलाइन करने के लिए बदल रहा है। शेयरधारकों के लिए, लीडरशिप में निरंतरता और कल्चरल अडाप्टेशन पर यह फोकस एक महत्वपूर्ण बात है, क्योंकि यह एक बड़े समूह की इनोवेशन करने और टैलेंट आकर्षित करने की लंबी अवधि की क्षमता को प्रभावित करता है। इस कार्यक्रम का समापन एमसीसीआई के लिए नए नेतृत्व की नियुक्ति के साथ हुआ, जिसमें डेल्फी टीवीएस टेक्नोलॉजीज (Delphi TVS Technologies) के ए. विश्वनाथन (A. Viswanathan) को प्रेसिडेंट और व्हील्स इंडिया (Wheels India) के मुरली वैद्यनाथन (Murali Vaidyanathan) को वाइस-प्रेसिडेंट नियुक्त किया गया।
