कोलकाता में दुर्गा पूजा का आयोजन करने वाली कमेटियों के सामने इस साल बड़ा आर्थिक संकट खड़ा हो गया है। कॉरपोरेट स्पॉन्सरशिप में **30-40%** की कमी आई है, जिससे बजट का गणित बिगड़ गया है।
कोलकाता का दुर्गा पूजा उत्सव न केवल आस्था का केंद्र है, बल्कि यह एक बड़ा आर्थिक इंजन भी है। लेकिन इस साल आयोजकों को फंड जुटाने में काफी मशक्कत करनी पड़ रही है। पिछले वर्षों की तुलना में कॉरपोरेट फंडिंग में 30-40% की गिरावट आई है, जिससे पंडालों की भव्यता और अन्य खर्चों को कम करना मजबूरी बन गया है।
सरकारी ग्रांट और बड़े आयोजकों का फैसला
राज्य सरकार ने पूजा कमेटियों को ₹1 लाख की ग्रांट देने का ऐलान किया था। हालांकि, संतोषपुर लेक पल्ली और सिंगी पार्क जैसी बड़ी कमेटियों ने इसे लेने से मना कर दिया है। यह फैसला सुवेंदु अधिकारी की अपील के बाद लिया गया, ताकि छोटे पूजा आयोजनों को ज्यादा मदद मिल सके।
कॉर्पोरेट निवेश का बदलता स्वरूप
जहाँ पारंपरिक स्पॉन्सरशिप घट रही है, वहीं Adani Group जैसे बड़े कॉर्पोरेट्स अब चुनिंदा इवेंट्स पर दांव लगा रहे हैं। उन्होंने 'दुर्गा पूजा अदानी प्रीव्यू' के लिए ₹2 करोड़ का बजट रखा है, जो आठ चुनिंदा पूजा कमेटियों में बांटा जाएगा।
नए नियम और चुनौतियां
कोलकाता म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन के नए नियमों ने भी मुश्किलें बढ़ाई हैं। विज्ञापनों के लिए होर्डिंग्स लगाने की समय सीमा अब महालया से सात दिन पहले और विजया दशमी के सात दिन बाद तक ही सीमित कर दी गई है। विज्ञापन का समय कम होने से कंपनियों ने अपना बजट घटा दिया है।
जांच का साया
इस बीच, प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने मासआर्ट सोसाइटी और पूर्व मंत्री इंद्रनील सेन से जुड़े ठिकानों पर छापेमारी की है। पूजा प्रीव्यू इवेंट्स के नाम पर फंड के कथित दुरुपयोग की जांच चल रही है, जिससे उन कमेटियों में घबराहट है जिनका आर्थिक ढांचा थोड़ा जटिल रहा है। अब आयोजकों की पूरी नजर आर्टिस्ट्स और डेकोरेटर्स के भुगतान को समय पर पूरा करने पर टिकी है।
