Junk Food Regulation: स्कूलों के पास जंक फूड पर सख्ती की तैयारी, FMCG कंपनियों की बढ़ेगी चुनौती

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AuthorAditya Rao|Published at:
Junk Food Regulation: स्कूलों के पास जंक फूड पर सख्ती की तैयारी, FMCG कंपनियों की बढ़ेगी चुनौती

केरल सरकार ने FSSAI से हाई-फैट, शुगर और सॉल्ट (HFSS) वाले फूड प्रोडक्ट्स पर नियमों को जल्द लागू करने की मांग की है। अगर स्कूलों के पास इन प्रोडक्ट्स की बिक्री पर रोक लगती है, तो बड़ी FMCG कंपनियों के लिए रेगुलेटरी चुनौतियां बढ़ सकती हैं।

केरल सरकार ने फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया (FSSAI) से उन खाद्य पदार्थों पर नियमों को तुरंत फाइनल करने को कहा है, जिनमें फैट, शुगर और नमक की मात्रा अधिक (HFSS) है। राज्य के स्वास्थ्य अधिकारियों का कहना है कि स्पष्ट कानूनी परिभाषा के अभाव में इन अस्वास्थ्यकर उत्पादों पर रोक लगाना मुश्किल हो रहा है। केरल एक राष्ट्रीय स्तर का फ्रेमवर्क चाहता है ताकि स्कूलों के आसपास मिलने वाले प्रोसेस्ड फूड्स पर प्रभावी पाबंदी लगाई जा सके।

नियमों का पेंच और सख्ती

FSSAI ने 7 अगस्त, 2026 को एक ड्राफ्ट जारी किया था, जिसमें प्रोसेस्ड फूड के लिए पोषक तत्वों की सीमा तय की गई थी। इसमें ठोस खाद्य पदार्थों के लिए प्रति 100 ग्राम और लिक्विड प्रोडक्ट्स के लिए प्रति 100 मिलीलीटर पर फैट, शुगर और सॉल्ट की कैपिंग का प्रस्ताव है। फिलहाल यह सिर्फ ड्राफ्ट है, जिसे कानूनी रूप मिलना बाकी है।

FMCG सेक्टर पर क्या असर होगा?

यह कदम भारतीय FMCG कंपनियों के लिए चिंता का विषय हो सकता है। अगर ये नियम लागू होते हैं, तो कंपनियों को अपनी रेसिपी में बदलाव करना पड़ सकता है ताकि वे HFSS कैटेगरी से बाहर रहें। इससे उत्पादन लागत (Production Cost) में बढ़ोतरी होना तय है।

इतना ही नहीं, फ्रंट-ऑफ-पैक लेबलिंग (FOPL) के नियमों के साथ-साथ स्कूलों के पास बिक्री पर बैन लगने से कंपनियों के डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क पर भी असर पड़ेगा। निवेशक अब यह देख रहे हैं कि बड़ी कंपनियां अपने पोर्टफोलियो में कैसे बदलाव करती हैं, ताकि मार्जिन पर ज्यादा दबाव न पड़े।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.