केरल में लोअर प्राइमरी स्कूल टीचर (LPST) के अभ्यर्थी 36वें दिन भी प्रदर्शन कर रहे हैं। वे मई 2025 की रैंक लिस्ट से तुरंत नियुक्ति की मांग कर रहे हैं। अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल और प्रतीकात्मक प्रदर्शनों के बीच, अभ्यर्थियों ने सरकार के दो महीने के इंतजार के प्रस्ताव को ठुकरा दिया है। यह गतिरोध भर्ती में पारदर्शिता और सरकारी सहायता प्राप्त स्कूलों में खाली पदों के प्रबंधन को लेकर बड़ी चिंताओं को दर्शाता है।
अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल और बढ़ता गुस्सा
केरल में लोअर प्राइमरी स्कूल टीचर (LPST) रैंक धारकों का आंदोलन आज, 10 अगस्त 2026, को 36वें दिन में प्रवेश कर गया है। अभ्यर्थी तिरुवनंतपुरम में राज्य सचिवालय के बाहर जमा होकर मई 2025 में जारी हुई रैंक लिस्ट के आधार पर तत्काल नियुक्ति की मांग कर रहे हैं। प्रदर्शनकारियों ने अपनी हताशा व्यक्त करने के लिए 8 अगस्त को घास खाने जैसे प्रतीकात्मक विरोध प्रदर्शन भी किए, जिससे सरकार की धीमी भर्ती प्रक्रिया पर उनका गुस्सा साफ जाहिर हो रहा है।
यह आंदोलन 'ऑल केरल लोअर प्राइमरी स्कूल टीचर रैंक होल्डर्स एसोसिएशन' के नेतृत्व में चल रहा है। एसोसिएशन के सचिव, वालरमथी एस, पिछले 12 दिनों से अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर हैं। प्रदर्शनकारी केवल तत्काल नौकरी ही नहीं चाहते, बल्कि राज्य में भर्ती की प्रक्रिया में संरचनात्मक बदलाव की भी मांग कर रहे हैं। उनकी मुख्य मांगों में केरल पब्लिक सर्विस कमीशन (PSC) को रिक्तियों की रिपोर्ट करने के लिए एक पारदर्शी प्रणाली लागू करना, 1:25 के शिक्षक-छात्र अनुपात को लागू करना और कुछ स्कूलों में छात्र नामांकन में गिरावट के कारण जोखिम में पड़े शिक्षण पदों की सुरक्षा सुनिश्चित करना शामिल है।
इसके अलावा, एसोसिएशन सहायता प्राप्त स्कूलों के संबंध में महत्वपूर्ण नीतिगत बदलावों की भी मांग कर रहा है। वे चाहते हैं कि सहायता प्राप्त संस्थानों में हेड टीचर और अन्य शिक्षण पदों की रिक्तियां, जो वर्तमान में अक्सर निजी प्रबंधन भर्ती के माध्यम से भरी जाती हैं, उन्हें PSC भर्ती के दायरे में लाया जाए। उनका तर्क है कि इससे योग्य उम्मीदवारों के लिए नौकरियों तक पहुंच अधिक निष्पक्ष होगी।
सरकार के प्रस्तावों को ठुकराया
राज्य सरकार ने प्रदर्शनकारियों से बात करने की कोशिश की है और उठाए गए मुद्दों का गहन अध्ययन करने के लिए दो महीने का समय मांगा है। हालांकि, रैंक धारकों ने इस प्रस्ताव को टालमटोल की रणनीति मानते हुए खारिज कर दिया है। उनका कहना है कि उनकी योग्यता वैध है और देरी के कारण उन्हें व्यक्तिगत और व्यावसायिक रूप से काफी परेशानी हो रही है, क्योंकि उनकी रैंक लिस्ट की वैधता लगातार कम होती जा रही है।
यह विरोध प्रदर्शन केरल में भर्ती प्रक्रियाओं की सत्यनिष्ठा को लेकर व्यापक सार्वजनिक चिंता के बीच हो रहा है। हाल ही में PSC भी सवालों के घेरे में आया है, जहां विभिन्न भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं की जांच क्राइम ब्रांच और एक विशेष जांच दल द्वारा की जा रही है। हालांकि LPST उम्मीदवारों की मांगें उनकी अपनी नियुक्तियों से संबंधित हैं, यह स्थिति सरकारी नौकरियों में पारदर्शिता और दक्षता पर एक बड़ी सार्वजनिक बहस को उजागर करती है।
निवेशक और आम नागरिक इस स्थिति पर नज़र बनाए हुए हैं कि क्या सरकार नियुक्ति प्रक्रिया में तेजी लाएगी या यह गतिरोध जारी रहेगा। अगली महत्वपूर्ण बात यह होगी कि क्या सरकार एक संशोधित समय-सीमा प्रदान करती है या बातचीत और टूट जाती है, जिससे और भी बड़े पैमाने पर प्रदर्शन हो सकते हैं।
