Kerala Public Service Commission (PSC) के चेयरमैन को हटाने की कवायद ने राज्य में एक बड़ा संवैधानिक विवाद खड़ा कर दिया है। सवाल उठ रहे हैं कि क्या इस प्रक्रिया में सुप्रीम कोर्ट की अनिवार्य जांच और संविधान के अनुच्छेद 317 का पालन किया गया है।
विवाद की जड़ क्या है?
पूरा मामला पूर्व गवर्नर राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर द्वारा PSC चेयरमैन एम.आर. बैजू को हटाने की सिफारिश से शुरू हुआ। आरोप है कि स्टेट प्लानिंग बोर्ड की परीक्षाओं और आयोग की अन्य प्रक्रियाओं में धांधली हुई थी, जिसकी जांच राज्य की क्राइम ब्रांच ने की थी। अब यह मामला प्रशासनिक स्तर से ऊपर उठकर संवैधानिक सीमाओं की लड़ाई बन चुका है।
अनुच्छेद 317 का पेच
भारतीय संविधान का अनुच्छेद 317 स्पष्ट करता है कि राज्य लोक सेवा आयोग के प्रमुख को केवल राष्ट्रपति ही हटा सकते हैं, और वह भी तब जब सुप्रीम कोर्ट की एक औपचारिक जांच में उन पर 'दुर्व्यवहार' साबित हो जाए। विपक्षी नेता पिनाराई विजयन ने तर्क दिया है कि इस प्रक्रिया को दरकिनार करना संस्था की स्वायत्तता पर सीधा प्रहार है। इसके साथ ही, अनुच्छेद 163 के तहत गवर्नर और राज्य मंत्रिमंडल के बीच अधिकारों के तालमेल पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।
भविष्य की राह
राज्य की प्रशासनिक स्थिरता के लिहाज से यह मुद्दा बेहद संवेदनशील है। नए गवर्नर ओम प्रकाश माथुर के पदभार संभालने के बाद, अब सबकी निगाहें इस पर टिकी हैं कि क्या मामला कानूनी कार्रवाई की ओर बढ़ेगा या सरकार और राजभवन के बीच कोई नया समझौता निकलकर सामने आएगा।
