केरल ड्रग केस: कासरगोड में राजनीतिक घमासान तेज, CM के दफ्तर पर लगे आरोप

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AuthorAditya Rao|Published at:
केरल ड्रग केस: कासरगोड में राजनीतिक घमासान तेज, CM के दफ्तर पर लगे आरोप

केरल के कासरगोड में 139 ग्राम MDMA के साथ तीन लोगों की गिरफ्तारी के बाद CPI(M) और कांग्रेस के बीच सियासी घमासान छिड़ गया है। CPI(M) ने आरोप लगाया है कि गिरफ्तार आरोपियों में से एक का मुख्यमंत्री V.D. Satheesan से संबंध था, जिसे कांग्रेस ने सिरे से खारिज कर दिया है। यह घटना राज्य के 'ऑपरेशन तूफान' एंटी-ड्रग अभियान की विश्वसनीयता पर भी सवाल खड़े करती है।

ड्रग्स की खेप, राजनीतिक तूफान!

केरल के कासरगोड में हाल ही में हुई एक ड्रग्स की बरामदगी ने राज्य की राजनीति में भूचाल ला दिया है। 9 अगस्त 2026 को, पुलिस ने वाहन से करीब 139 ग्राम MDMA बरामद किया और इस सिलसिले में P.A. Abdul Salam, K.H. Muhammad Hussain, और P.A. Abbas नाम के तीन लोगों को गिरफ्तार किया। इस हाई-प्रोफाइल गिरफ्तारी के बाद सत्ताधारी पार्टी और विपक्षी दलों के बीच तीखी नोकझोंक शुरू हो गई है।

CPI(M) का CM दफ्तर पर निशाना

भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) यानी CPI(M) ने आरोप लगाया है कि गिरफ्तार आरोपी K.H. Muhammad Hussain, मुख्यमंत्री V.D. Satheesan के दफ्तर से जुड़े सोशल मीडिया अकाउंट को संभालता था। CPI(M) ने इस मामले में बाकायदा जांच की मांग की है और सोशल मीडिया पर वायरल हो रही तस्वीरों का हवाला दिया है, जिनमें आरोपी और मुख्यमंत्री की पुरानी मुलाकातें दिखाई गई हैं।

कांग्रेस का कड़ा खंडन

वहीं, कांग्रेस पार्टी ने इन आरोपों को पूरी तरह से बेबुनियाद बताया है। पार्टी नेताओं का कहना है कि जिस व्यक्ति पर आरोप लग रहे हैं, उसका मुख्यमंत्री के दफ्तर या यूथ कांग्रेस में कोई भी आधिकारिक पद नहीं था। कांग्रेस ने इन आरोपों को राजनीतिक द्वेष से प्रेरित बताया है और कहा कि यह उनकी छवि खराब करने की कोशिश है।

'ऑपरेशन तूफान' पर असर?

यह पूरा विवाद ऐसे समय में सामने आया है जब राज्य सरकार जून 2026 से 'ऑपरेशन तूफान' नाम से एक बड़ा ड्रग-विरोधी अभियान चला रही है। गिरफ्तारियों और उसके बाद शुरू हुई राजनीतिक बयानबाजी से यह सवाल उठ रहा है कि क्या इस तरह के विवाद राज्य सरकार की कानून-व्यवस्था की पहलों पर असर डाल सकते हैं।

केरल की राजनीति और प्रशासन के जानकारों का मानना है कि ऐसे विवादों से शासन में स्थिरता को लेकर सवाल उठ सकते हैं, जो कानून-व्यवस्था को लागू करने में बाधा बन सकते हैं। आगे यह देखना अहम होगा कि जांच किस दिशा में बढ़ती है और क्या इन राजनीतिक आरोपों की पुष्टि होती है या वे महज सियासत बनकर रह जाते हैं।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.