केरल स्टेट ह्यूमन राइट्स कमीशन ने Indian Railways को एक महिला यात्री को गलत तरीके से ट्रेन से उतारने के मामले में **₹2 लाख** का मुआवजा देने का आदेश दिया है। यह फैसला रेलवे की टिकट मैनेजमेंट सिस्टम और कर्मचारियों की कार्यशैली पर गंभीर सवाल उठाता है।
क्या है पूरा मामला?
जुलाई 2023 में के. जयस्मिता नाम की एक महिला यात्री को ट्रेन संख्या 16348 से गलत तरीके से उतार दिया गया था। दरअसल, टिकट बुकिंग के समय मोबाइल नंबर की एक छोटी सी गलती के कारण बुकिंग कन्फर्मेशन किसी और के पास चला गया, जिसने उसे कैंसिल कर दिया। बावजूद इसके कि यात्री के पास वैध टिकट था, उन्हें अलुवा (Aluva) स्टेशन पर Railway Protection Force (RPF) द्वारा जबरन उतार दिया गया। आयोग ने इसे अधिकारों का हनन और RPF द्वारा अपनी शक्ति का दुरुपयोग करार दिया है।
आयोग का सख्त आदेश
केरल स्टेट ह्यूमन राइट्स कमीशन ने रेलवे को ₹2 लाख का मुआवजा 1 महीने के भीतर देने का निर्देश दिया है। यदि भुगतान में 6 सप्ताह से अधिक की देरी होती है, तो रेलवे को 8% अतिरिक्त ब्याज का जुर्माना भी भरना होगा।
Accountability और प्रशासनिक सुधार
इस मामले में एक बड़ा मोड़ यह है कि आयोग ने Southern Railway को उन अधिकारियों के खिलाफ जांच करने की अनुमति दी है जो इस घटना के लिए जिम्मेदार थे। रेलवे विभाग अब इस हर्जाने की राशि को जिम्मेदार कर्मचारियों से वसूल भी सकता है। साथ ही, आयोग ने रेलवे को Railways Act की धारा 137 और 139 का कड़ाई से पालन करने को कहा है, जो यात्रियों की सुरक्षा और सम्मान से जुड़ी है, खासकर रात में यात्रा करने वाली महिलाओं के लिए।
अब सबकी नजर इस बात पर है कि क्या रेलवे अपने डिजिटल बुकिंग सिस्टम की खामियों को सुधारेगा या नहीं, ताकि भविष्य में किसी अन्य यात्री को ऐसी परेशानी का सामना न करना पड़े।
