केरल विधानसभा ने एक दुर्लभ संवैधानिक कदम उठाते हुए मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) Gyanesh Kumar को हटाने के लिए प्रस्ताव पारित किया है। इस प्रस्ताव के पीछे बड़ी वजह स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन के दौरान लाखों मतदाताओं के नाम हटाने के आरोप हैं।
केरल विधानसभा ने सोमवार को इतिहास रचते हुए मुख्य चुनाव आयुक्त Gyanesh Kumar को हटाने की मांग को लेकर औपचारिक प्रस्ताव पास किया। राज्य के किसी विधानमंडल द्वारा राष्ट्रीय चुनाव संस्था के प्रमुख को इस तरह चुनौती देना देश में एक दुर्लभ मामला है। इस प्रस्ताव को मुख्यमंत्री V.D. Satheesan ने पेश किया, जिसे सत्ताधारी United Democratic Front (UDF) और विपक्षी Left Democratic Front (LDF) दोनों का समर्थन मिला, जो राज्य की राजनीति में एक अनोखा तालमेल दिखाता है।
चुनावी अखंडता पर सवाल
इस विधायी कार्रवाई के पीछे मुख्य वजह इलेक्टोरल रोल (Electoral Roll) का 'स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन' है। राज्य के नेताओं का आरोप है कि इस प्रक्रिया में लाखों मतदाताओं के नाम गलत तरीके से हटा दिए गए हैं, जो संवैधानिक अधिकारों का उल्लंघन है। विधानसभा सत्र के दौरान तर्क दिया गया कि नाम हटाने के इस पैमाने ने चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर जनता का भरोसा कम कर दिया है।
प्रस्तावित संस्थागत सुधार
चुनाव आयुक्त को हटाने की मांग के अलावा, विधानसभा ने चुनाव आयुक्तों के चयन की प्रक्रिया में बदलाव की भी वकालत की है। प्रस्ताव में मांग की गई है कि चयन समिति में प्रधानमंत्री, लोकसभा में विपक्ष के नेता और भारत के मुख्य न्यायाधीश (Chief Justice of India) को शामिल किया जाना चाहिए। इससे सिस्टम में राजनीतिक दखल कम होगा और पारदर्शिता बढ़ेगी।
राजनीतिक खींचतान
इस सत्र में राज्य के मुख्य राजनीतिक दलों में दुर्लभ सहमति के बावजूद विरोध भी देखने को मिला। राज्य भाजपा अध्यक्ष Rajeev Chandrasekhar समेत पार्टी के विधायकों ने इस प्रस्ताव का कड़ा विरोध किया और इसे राजनीति से प्रेरित बताया। अंततः, ध्वनि मत से प्रस्ताव पारित कर दिया गया। अब सबकी नजरें इस पर टिकी हैं कि केंद्र सरकार और चुनाव आयोग इस अभूतपूर्व चुनौती पर क्या प्रतिक्रिया देते हैं।
