Kenro Capital भारतीय और दक्षिण-पूर्व एशियाई स्टार्टअप्स में लेट-स्टेज सेकेंडरी ट्रांज़ैक्शन्स के लिए **$120-150 मिलियन** का फंड जुटा रहा है। इसका मकसद उन शुरुआती निवेशकों को लिक्विडिटी देना है जो कंपनियों के लंबे समय तक प्राइवेट रहने के कारण अपने निवेश पर रिटर्न का इंतजार कर रहे हैं। फर्म ने ग्लोबल निवेशकों से पहला क्लोजिंग हासिल कर ली है और अब डोमेस्टिक कैपिटल की तलाश में है।
प्राइवेट मार्केट्स में लिक्विडिटी का बढ़ता बाज़ार
Kenro Capital, जो 2024 के अंत में स्थापित हुई एक सेकेंडरी मार्केट इन्वेस्टमेंट फर्म है, अपने नए फंड को $120 मिलियन से $150 मिलियन के टारगेट के साथ क्लोज करने की तैयारी में है। TR Capital और Peak XV के पूर्व एग्जीक्यूटिव्स, Piyush Gupta और Norbert Fernandes द्वारा स्थापित इस फर्म का खास फोकस लेट-स्टेज कंपनियों में मौजूदा निवेशकों से हिस्सेदारी खरीदना है। यह मॉडल उन शुरुआती निवेशकों के लिए एग्जिट का रास्ता खोलता है जो कंपनी के पब्लिक होने का इंतजार किए बिना अपने निवेश पर रिटर्न हासिल करना चाहते हैं।
डोमेस्टिक कैपिटल पर नज़र
फंड ने अक्टूबर 2025 में अपनी पहली क्लोजिंग सफलतापूर्वक पूरी कर ली है, जिसमें ग्लोबल इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टर्स की दिलचस्पी देखी गई। फर्म के अनुसार, वे वर्तमान में डोमेस्टिक फैमिली ऑफिस और संस्थानों के साथ बाकी की कैपिटल जुटाने के लिए बातचीत कर रहे हैं। अगले चार से छह महीनों में फाइनल क्लोजिंग की उम्मीद है। जैसे-जैसे कंपनियां ज़्यादा समय तक प्राइवेट रहने का फैसला कर रही हैं, सेकेंडरी ट्रांज़ैक्शन्स की मांग में काफी वृद्धि हुई है। इन ट्रांज़ैक्शन्स में निवेशक सीधे कंपनी से शेयर खरीदने के बजाय दूसरे निवेशकों से शेयर खरीदते हैं। यह नए निवेशकों को स्थापित, अक्सर मुनाफे वाली कंपनियों में प्राइमरी फंडिंग राउंड की तुलना में अधिक सुलभ वैल्यूएशन पर प्रवेश करने का मौका देता है।
सेकेंडरी मार्केट में बढ़ती प्रतिस्पर्धा
Kenro Capital भारत में एक ऐसे बाज़ार में कदम रख रहा है जहाँ प्रतिस्पर्धा तेज़ी से बढ़ रही है। HarbourVest, Pantheon Ventures और Schroders Capital जैसे बड़े ग्लोबल प्लेयर्स भारतीय सेकेंडरी मार्केट में अपनी मौजूदगी बढ़ा रहे हैं। डोमेस्टिक लेवल पर भी, 360 One Asset Management ने ₹5,000 करोड़ का सेकेंडरी फंड और Neo Asset Management ₹2,000 करोड़ का फंड लाने की घोषणा की है। Oister Group, Tribe Capital Management और PixelSky जैसे अन्य प्लेयर्स भी सक्रिय हैं। यह एक व्यापक ट्रेंड को दर्शाता है जहाँ फंड वेंचर कैपिटल (VC) और प्राइवेट इक्विटी (PE) फर्मों को लिक्विडिटी ऑफर करने के लिए प्रतिस्पर्धा कर रहे हैं, जो अपने इन्वेस्टमेंट साइकिल्स के अंत के करीब हैं।
इन्वेस्टमेंट स्ट्रैटेजी और पोर्टफोलियो
Kenro Capital ने पहले ही $115 मिलियन से अधिक के सेकेंडरी ट्रांज़ैक्शन्स की सुविधा प्रदान की है। इनके पोर्टफोलियो में K12 Techno Services, Giva और Pine Labs जैसी कंपनियां शामिल हैं। फर्म की इन्वेस्टमेंट स्ट्रैटेजी फाइनेंशियल सर्विसेज, कंज्यूमर गुड्स, हेल्थकेयर और एंटरप्राइज टेक्नोलॉजी सेक्टर की कंपनियों पर केंद्रित है। वे आमतौर पर मार्केट-लीडिंग कंपनियों में माइनॉरिटी स्टेक खरीदते हैं जो या तो पहले से ही प्रॉफिटेबल हैं या उस मुकाम पर पहुंचने के करीब हैं। हालांकि इनके डायरेक्ट डील्स का टिपिकल टिकट साइज़ $10 मिलियन से $20 मिलियन के बीच होता है, फर्म अपने लिमिटेड पार्टनर्स (LPs) के साथ को-इन्वेस्टमेंट स्ट्रक्चर का उपयोग करके बड़ी डील्स में भी भाग लेती है। इस स्पेस में निवेशक फर्म की फाइनल फंडरेजिंग गोल पर नज़र रख सकते हैं, क्योंकि ऐसे फंड्स की सफलता अक्सर हाई-क्वालिटी एसेट्स सोर्स करने और टारगेटेड दो-तीन साल की समय-सीमा के भीतर पब्लिक लिस्टिंग जैसी एग्जिट अपॉर्च्युनिटीज़ खोजने की क्षमता पर निर्भर करती है।
