जम्मू-कश्मीर अपने **25** जीआई (GI) टैग वाले उत्पादों, जैसे कि केसर और पश्मीना को अंतरराष्ट्रीय बाजारों में उतारने की तैयारी कर रहा है। हालांकि जीआई टैग से प्रीमियम कीमतें तो मिल रही हैं, लेकिन टेस्टिंग की धीमी रफ्तार और नकली सामान का खतरा ब्रांड की साख के लिए बड़ी चुनौती बना हुआ है।
जम्मू-कश्मीर अब अपने जीआई-सर्टिफाइड उत्पादों को ग्लोबल ट्रेड का हिस्सा बनाने की मुहिम में जुट गया है। इसमें हाथ से बने कालीन, कानी शॉल और प्रीमियम केसर जैसे उत्पाद शामिल हैं। जीआई टैग की मदद से स्थानीय कारीगरों और छोटे व्यवसायों को अपने उत्पादों के लिए अंतरराष्ट्रीय बाजार में बेहतर और प्रीमियम दाम मिलने की उम्मीद है। श्रीनगर में हाल ही में हुए कई ट्रेड इवेंट्स का मकसद भी इन क्षेत्रीय उत्पादों को दुनिया भर के खरीदारों से जोड़ना था।
टेस्टिंग क्षमता और एक्सपोर्ट की रफ्तार
निर्यात बढ़ाने की इस कोशिश के बीच सबसे बड़ी समस्या क्वालिटी जांच (Quality Testing) की है। फिलहाल, यह इलाका पश्मीना टेस्टिंग एंड क्वालिटी सर्टिफिकेशन सेंटर और इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ कारपेट टेक्नोलॉजी जैसी सीमित सुविधाओं पर निर्भर है। सर्टिफिकेशन की भारी मांग के कारण अक्सर बैकलॉग (Backlog) की समस्या हो जाती है, जिससे एक्सपोर्ट में कई हफ्तों या महीनों की देरी होती है। अंतरराष्ट्रीय खरीदार, जिन्हें तेजी से सर्टिफाइड डिलीवरी चाहिए, उनके लिए यह देरी बिजनेस बढ़ाने में एक बड़ी बाधा है। यदि कश्मीर को ग्लोबल रिटेलर्स की मांग पूरी करनी है, तो लैबोरेटरी की क्षमता बढ़ाना अनिवार्य है।
नकली सामान (Counterfeit) का खतरा
कश्मीरी उत्पादों की साख के लिए सबसे बड़ा खतरा बाहर बनने वाले नकली सामान हैं, जो 'कश्मीरी' नाम से बिक रहे हैं। इससे असली और सर्टिफाइड उत्पादों की वैल्यू गिर रही है। सरकार ने इसके समाधान के लिए क्यूआर कोड-आधारित लेबलिंग सिस्टम लागू किया है ताकि उत्पादों की शुद्धता को ट्रैक किया जा सके। हालांकि, असली सफलता इस पर निर्भर करेगी कि सरकार कितनी सख्ती से नकली सामान पर रोक लगाती है और सर्टिफिकेशन प्रक्रिया को कितना तेज करती है।
चूंकि यह सेक्टर बड़े कॉर्पोरेट्स के बजाय मुख्य रूप से एमएसएमई (MSME), कोऑपरेटिव्स और कारीगर समूहों पर टिका है, इसलिए इसका असर सीधे तौर पर स्थानीय अर्थव्यवस्था पर पड़ता है। बाजार विश्लेषक अब यह देख रहे हैं कि क्या बेहतर टेक्नोलॉजी और लैब कैपेसिटी का कॉम्बिनेशन इन जीआई उत्पादों को ग्लोबल स्तर पर लगातार एक्सपोर्ट ग्रोथ दिला पाएगा या नहीं।
