कर्नाटक सरकार ने केंद्र सरकार से Upper Bhadra और Mekedatu प्रोजेक्ट्स के लिए जल्द मंजूरी मांगी है। इन प्रोजेक्ट्स की कुल लागत **₹21,167 करोड़** से ज्यादा है, जो राज्य में इंफ्रास्ट्रक्चर और इरिगेशन सेक्टर के लिए बड़े गेम-चेंजर साबित हो सकते हैं।
बड़े प्रोजेक्ट्स पर सरकार की नजर
कर्नाटक सरकार इन महत्वपूर्ण जल परियोजनाओं को जल्द से जल्द शुरू करने की कोशिशों में जुटी है। हाल ही में, डिप्टी सीएम डीके शिवकुमार ने नई दिल्ली में केंद्रीय जल शक्ति मंत्री से मुलाकात की, ताकि पेंडिंग क्लियरेंस और फंडिंग की प्रक्रिया में तेजी लाई जा सके।
Upper Bhadra प्रोजेक्ट का गणित
₹21,167.93 करोड़ की लागत वाला अपर भद्रा प्रोजेक्ट राज्य की प्राथमिकता में है। सरकार इसे 'प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना' के साथ जोड़ने की कोशिश कर रही है, ताकि केंद्र से लगातार वित्तीय मदद मिलती रहे। इस कदम का मुख्य उद्देश्य प्रोजेक्ट को कागजों से निकालकर जमीनी स्तर पर उतारना है। वहीं, Mekedatu प्रोजेक्ट के लिए भी राज्य ने सेंट्रल वॉटर कमीशन को अपनी अनुपालन रिपोर्ट सौंप दी है, जो राज्य की पेयजल और सिंचाई जरूरतों के लिए एक अहम मील का पत्थर है।
निवेशकों के लिए संकेत
इन्वेस्टर्स के नजरिए से यह खबर काफी अहम है, क्योंकि इन बड़े प्रोजेक्ट्स के शुरू होने से कंस्ट्रक्शन, सीमेंट, स्टील और इलेक्ट्रिकल इक्विपमेंट बनाने वाली कंपनियों के लिए नए ऑर्डर्स के दरवाजे खुलेंगे। ईपीसी (EPC) सेक्टर की कंपनियों को इससे सीधे तौर पर रेवेन्यू में उछाल देखने को मिल सकता है।
रिस्क फैक्टर और चुनौतियां
हालांकि, निवेश से पहले कुछ बातों का ध्यान रखना जरूरी है। अंतर्राज्यीय जल विवाद (Interstate Water Disputes) अक्सर इन प्रोजेक्ट्स को लंबा खींच देते हैं। कृष्णा जल विवाद ट्रिब्यूनल-II अवार्ड पर गजट नोटिफिकेशन में देरी भी एक बड़ी कानूनी अड़चन बनी हुई है। इसके अलावा, केंद्र और राज्य के बीच तालमेल और फंडिंग की अनिश्चितता प्रोजेक्ट की टाइमलाइन को प्रभावित कर सकती है।
बाजार के जानकारों को अब सेंट्रल वॉटर कमीशन की अप्रेजल टाइमलाइन और प्रोजेक्ट फंडिंग से जुड़ी आधिकारिक घोषणाओं पर बारीकी से नजर रखने की जरूरत है, क्योंकि यही अपडेट्स टेंडरिंग और कंस्ट्रक्शन शुरू होने का सही संकेत देंगे।
