बेंगलुरु को मॉडर्न सिटी बनाने के लिए कर्नाटक सरकार ने एक बड़ा रोडमैप पेश किया है। **2037** तक चलने वाले इस **₹1 लाख करोड़** के प्रोजेक्ट में मेट्रो विस्तार, टनल और नई सड़कों का जाल बिछाया जाएगा, जिस पर निवेशकों की पैनी नजर है।
कर्नाटक सरकार ने बेंगलुरु के ट्रैफिक और यूटिलिटी इंफ्रास्ट्रक्चर को बदलने के लिए ₹1 लाख करोड़ का भारी-भरकम प्लान तैयार किया है। इस मेगा प्रोजेक्ट का लक्ष्य 2037 तक शहर को एक हाई-कैपेसिटी ट्रांजिट हब में तब्दील करना है।
प्रमुख इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स
इस योजना में 40 किमी का टनल कॉरिडोर और 120 किमी लंबा एलिवेटेड रोड नेटवर्क शामिल है। सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा 16.5 किमी का नॉर्थ-साउथ कॉरिडोर है, जिसकी अनुमानित लागत ₹17,780 करोड़ है, जिसमें से ₹7,000 करोड़ राज्य सरकार ने अभी मंजूर किए हैं। इसके अलावा, नम्मा मेट्रो को मौजूदा 96 किमी से बढ़ाकर 2027 तक 170 किमी करने का लक्ष्य है। साथ ही, पब्लिक ट्रांसपोर्ट में 4,500 नई बसें और 150 किमी तक सबर्बन रेल कनेक्टिविटी पर जोर दिया जाएगा।
यूटिलिटी और गवर्नेंस में बदलाव
सिर्फ सड़कों तक सीमित न रहकर, कावेरी स्टेज-6 प्रोजेक्ट के जरिए जल आपूर्ति को बेहतर बनाने पर ध्यान दिया गया है। बेंगलुरु वाटर सप्लाई एंड सीवरेज बोर्ड के जरिए सर्विस अपग्रेड्स किए जाएंगे। शहर के विस्तार को देखते हुए 65 ग्राम पंचायतों को अर्बन लोकल बॉडीज में बदला जा रहा है ताकि वहां बेहतर सीवरेज नेटवर्क दिया जा सके।
निवेशकों के लिए रिस्क और चुनौतियां
इतने बड़े प्रोजेक्ट्स के साथ कई रिस्क भी जुड़े होते हैं। जमीन अधिग्रहण (Land Acquisition) में देरी, कॉस्ट ओवररन और टेक्निकल क्लियरेंस जैसे मुद्दे निवेशकों के लिए चिंता का विषय हो सकते हैं। राज्य की वित्तीय स्थिति और फंड आवंटन में निरंतरता भी काफी अहम होगी। आगे चलकर टेंडरिंग की रफ्तार और बजट एलोकेशन पर नजर रखना जरूरी है, क्योंकि ऐसे बड़े प्रोजेक्ट्स अक्सर एग्जीक्यूशन में देरी का सामना करते हैं।
