Karnataka में 'Mission Nikhara' के तहत हुई छापेमारी में पेट्रोल पंपों पर तेल कम मिलने के मामले सामने आए हैं। राज्य सरकार अब सख्ती बरत रही है और केंद्र से रिकैलिब्रेशन पीरियड को **24 महीने** से घटाकर फिर से **12 महीने** करने की मांग कर रही है।
बड़े पैमाने पर अनियमितताएं
कर्नाटक सरकार के लीगल मेट्रोलॉजी विभाग ने राज्य के 5,946 में से 805 पेट्रोल पंपों की अचानक जांच की। इस औचक निरीक्षण में चौंकाने वाले आंकड़े सामने आए हैं—कुल 768 आउटलेट्स को तत्काल रिकैलिब्रेशन की जरूरत पड़ी। डेटा के मुताबिक, हर 10 में से 8.5 नोजल पर ईंधन कम मिलने की समस्या पाई गई है।
प्रशासन का एक्शन
इस धांधली पर लगाम लगाने के लिए प्रशासन ने अब तक 101 मामले दर्ज किए हैं और ₹6.66 लाख का जुर्माना वसूला है। सरकार ने चेतावनी दी है कि यदि पंप मालिकों ने मानक मानकों का पालन नहीं किया, तो उन पर ताला भी लग सकता है।
नियमों में बदलाव की मांग
राज्य सरकार अब केंद्र सरकार के सामने एक बड़ी मांग रखने जा रही है। वर्तमान में 'Legal Metrology (General) Seventh Amendment Rules, 2025' के तहत मशीनों के कैलिब्रेशन के लिए 24 महीने का समय मिलता है। कर्नाटक का तर्क है कि ग्राहकों के साथ धोखाधड़ी रोकने के लिए इसे वापस 12 महीने के अनिवार्य चक्र पर लाया जाना चाहिए।
निवेशकों के लिए क्या है मायने?
एनर्जी सेक्टर और रिटेल फ्यूल डीलर्स के लिए यह एक संकेत है कि भविष्य में अनुपालन (Compliance) का बोझ बढ़ सकता है। यदि केंद्र सरकार इस मांग को मान लेती है, तो पूरे देश में पेट्रोल पंपों के लिए ऑपरेशनल कॉस्ट और एडमिनिस्ट्रेटिव काम बढ़ सकते हैं, जिसका असर डाउनस्ट्रीम फ्यूल इकोसिस्टम पर पड़ना तय है।
