बेंगलुरु की पानी की किल्लत दूर करने के लिए कर्नाटक के जल संसाधन मंत्री ने Central Water Commission (CWC) के साथ बैठक की। Mekedatu Reservoir प्रोजेक्ट अभी तकनीकी कारणों से अटका हुआ है और राज्य सरकार इसे गति देने के लिए पूरी कोशिश कर रही है।
कर्नाटक के जल संसाधन मंत्री एन. चलुवरयास्वामी ने 2 सितंबर, 2026 को नई दिल्ली में Central Water Commission (CWC) के चेयरमैन अनुपम प्रसाद से मुलाकात की। इस बैठक का मुख्य मकसद Mekedatu Balancing Reservoir प्रोजेक्ट को लेकर चल रहे रेगुलेटरी गतिरोध को खत्म करना और जरूरी मंजूरियों में तेजी लाना था।
राज्य सरकार का कहना है कि यह प्रोजेक्ट बेंगलुरु के लिए लाइफलाइन है। शहर की बढ़ती आबादी और मॉनसून की अनिश्चितता को देखते हुए, यह रिजर्वोयर पीने के पानी की आपूर्ति के साथ-साथ हाइड्रोइलेक्ट्रिक पावर जनरेशन के लिए भी काम आएगा।
क्यों अटका है मामला?
साल 2026 के मध्य में CWC ने प्रोजेक्ट की डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट (DPR) को वापस लौटा दिया था। इसकी बड़ी वजह पानी के बंटवारे को लेकर शर्तें थीं। कर्नाटक ने इस प्रोजेक्ट के लिए 6.95 tmcft पानी का उपयोग मांगा है, जबकि कावेरी जल विवाद न्यायाधिकरण (Cauvery Water Disputes Tribunal) ने पहले सिर्फ 4.75 tmcft की ही अनुमति दी थी। इसके अलावा, शिवनसमुद्र पावर प्रोजेक्ट को शामिल करने के कारण भी तकनीकी तालमेल बिठाना जरूरी हो गया है।
कानूनी और राजनीतिक दांव-पेच
तमिलनाडु सरकार इस प्रोजेक्ट का लगातार विरोध कर रही है। हालांकि, केंद्र सरकार पहले ही साफ कर चुकी है कि 2018 के सुप्रीम कोर्ट के फैसले के मुताबिक, कर्नाटक को अन्य राज्यों की सहमति लेने की जरूरत नहीं है, लेकिन तकनीकी क्लियरेंस के लिए संघीय नियमों का पालन अनिवार्य है। अब राज्य सरकार का पूरा फोकस एक नई और संशोधित DPR जमा करने पर है, जो ट्रिब्यूनल की सीमा के भीतर हो।
