| बेंगलुरु के दूसरे इंटरनेशनल एयरपोर्ट के लिए प्रस्तावित ज़मीन पर बीजेपी और राज्य सरकार के बीच राजनीतिक घमासान शुरू हो गया है। जहाँ अधिकारी कानकापुरा जैसे इलाकों पर विचार कर रहे हैं, वहीं विपक्ष तुमाकुरु को प्राथमिकता देने की मांग कर रहा है।
एयरपोर्ट की लोकेशन पर छिड़ी सियासत
| कर्नाटक में बेंगलुरु के दूसरे इंटरनेशनल एयरपोर्ट के लिए ज़मीन की तलाश अब राजनीतिक अखाड़े में तब्दील हो गई है। राज्य के बीजेपी अध्यक्ष बी. वाई. विजयेंद्र ने सरकार के कानकापुरा को एयरपोर्ट के लिए तरजीह देने की खबरों पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा है कि इस बड़े प्रोजेक्ट को तुमाकुरु में बनाया जाना चाहिए ताकि राज्य के दूसरे हिस्सों का भी विकास हो सके।
इंफ्रास्ट्रक्चर पर बढ़ता बोझ और क्षेत्रीय विकास
| विपक्ष का तर्क है कि बेंगलुरु के दक्षिणी हिस्से में एक और बड़े ट्रांसपोर्ट हब से शहर का पहले से ही टूटा इंफ्रास्ट्रक्चर और ज़्यादा दबाव में आ जाएगा। बढ़ती ट्रैफिक जाम, आबादी का घनत्व और पानी जैसे संसाधनों पर पड़ने वाले दबाव की चिंताएं जताई जा रही हैं। बीजेपी का कहना है कि तुमाकुरु में एयरपोर्ट बनाने से आर्थिक गतिविधियां पूरे राज्य में फैलेंगी और सिर्फ बेंगलुरु के आसपास ही सीमित नहीं रहेंगी। तुमाकुरु में मौजूदा रेल और रोड कनेक्टिविटी को देखते हुए इसे विकास का नया केंद्र बनाया जा सकता है।
मूल्यांकन प्रक्रिया और पर्यावरण की चिंताएं
| डिप्टी सीएम डी. के. शिवकुमार पहले ही बता चुके हैं कि सरकार कानकापुरा रोड और कुनिगल रोड जैसे दक्षिणी इलाकों में ज़मीन की तलाश कर रही है। फाइनल लोकेशन टेक्निकल जांच, ज़मीन अधिग्रहण की लागत और स्थानीय लोगों को कम से कम विस्थापित करने की कोशिशों पर निर्भर करेगी। कानकापुरा साइट के आलोचकों का यह भी कहना है कि यह बन्नेरघट्टा नेशनल पार्क के करीब है और उपजाऊ खेती की ज़मीन पर असर डालेगा। ऐसे मुद्दे अक्सर सरकारी मंज़ूरी मिलने में देरी करवाते हैं।
निवेशकों के लिए क्या मायने?
| इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर पर नज़र रखने वाले निवेशकों के लिए इस विवाद का नतीजा अहम होगा। इंटरनेशनल एयरपोर्ट जैसे बड़े प्रोजेक्ट क्षेत्रीय रियल एस्टेट, इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट और रोज़गार को सीधे तौर पर प्रभावित करते हैं। लोकेशन बदलने से पूरे इलाके का आर्थिक नक्शा बदल सकता है, जिसका असर कंस्ट्रक्शन कंपनियों, लॉजिस्टिक्स और रियल एस्टेट डेवलपर्स पर पड़ेगा। सरकार की फाइनल साइट चुनने, फंडिंग स्ट्रक्चर और पर्यावरण सम्बन्धी चिंताओं को दूर करने पर सभी की नज़रें टिकी रहेंगी।
