Karnataka की मतदाता सूची (Voter List) में बड़े बदलाव किए गए हैं। राज्य ने लिस्ट से करीब **99 लाख** नाम हटा दिए हैं, जिससे कुल मतदाताओं की संख्या घटकर **4.54 करोड़** रह गई है।
आंकड़ों में बड़ी हेरफेर
कर्नाटक के चीफ इलेक्टोरल ऑफिसर द्वारा जारी ताजा आंकड़ों के अनुसार, 'स्पेशल इंटेंसिव रिवीज़न' प्रक्रिया के बाद राज्य के वोटर डेटाबेस में भारी कमी आई है। पहले मतदाताओं की संख्या 5.54 करोड़ थी, जो अब सिमटकर 4.54 करोड़ पर आ गई है। यानी कुल रजिस्टर्ड वोटर्स में 18% की सीधी गिरावट दर्ज की गई है।
क्यों हटाए गए इतने नाम?
प्रशासनिक डेटा के मुताबिक, इस सफाई अभियान के पीछे कई कारण बताए गए हैं। इसमें लगभग 16.4 लाख नाम मृत व्यक्तियों के थे, जबकि 7 लाख से अधिक डुप्लीकेट एंट्रीज की पहचान की गई। इसके अलावा, 3.83 लाख अन्य कारणों से हटाए गए। हालांकि, ड्राफ्ट रोल के मुकाबले इस दौरान 8.64 लाख नए मतदाता जोड़े भी गए हैं।
पारदर्शिता पर उठे सवाल
इतने बड़े पैमाने पर नामों के हटने से राजनीतिक गलियारों और जानकारों के बीच हड़कंप है। आमतौर पर आबादी बढ़ने के साथ वोटर्स की संख्या भी बढ़नी चाहिए, लेकिन यहां उल्टा हुआ है। अब एक्सपर्ट्स इस 'डिजिटल रिवीज़न' प्रक्रिया के पीछे के लॉजिक और सॉफ्टवेयर के критериया (Criteria) पर स्पष्टीकरण मांग रहे हैं। लोगों को डर है कि कहीं तकनीकी खामी के कारण किसी पात्र नागरिक का नाम न कट गया हो। अब सबकी नज़र इस बात पर है कि क्या चुनाव अधिकारी इन लाखों नामों को हटाने का विस्तृत ब्यौरा सार्वजनिक करेंगे या नहीं।
