कर्नाटक के गृहमंत्री प्रियंक खरगे ने RSS के इतिहास और रजिस्ट्रेशन पर सवाल उठाए हैं। इसी बीच राज्य सरकार ने पब्लिक प्रॉपर्टी के इस्तेमाल को रेगुलेट करने के लिए एक नया बिल लाया है। यह एक राजनीतिक मामला है, जिसका शेयर बाजार या लिस्टेड कंपनियों पर कोई असर नहीं है।
कर्नाटक के गृहमंत्री प्रियंक खरगे ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के स्वतंत्रता संग्राम में भूमिका और उसके रजिस्ट्रेशन स्टेटस पर सार्वजनिक रूप से सवाल उठाए हैं। यह बयान ऐसे समय आया है जब राज्य सरकार ने हाल ही में 'कर्नाटक सरकारी परिसर और सार्वजनिक संपत्ति का उपयोग विनियमन विधेयक, 2026' को कैबिनेट में मंजूरी दी है।
इस प्रस्तावित कानून के तहत, संगठनों को सरकारी परिसर या सार्वजनिक संपत्ति का उपयोग करने से पहले एक सक्षम प्राधिकारी से पूर्व अनुमति लेनी होगी। राज्य सरकार का कहना है कि यह एक निष्पक्ष, प्रशासनिक कदम है जिसका उद्देश्य न्यायिक निर्देशों के अनुसार सार्वजनिक स्थानों के नियमित उपयोग को सुनिश्चित करना है। अधिकारियों ने इस बात से इनकार किया है कि बिल विशेष रूप से RSS को निशाना बना रहा है, और जोर दिया है कि इसका मकसद सार्वजनिक सुविधाओं में काम करने की चाह रखने वाले सभी संगठनों के लिए एक मानकीकृत ढांचा तैयार करना है।
इन घटनाक्रमों पर प्रतिक्रिया देते हुए, बीजेपी नेता बी.एल. संतोष ने कहा कि RSS को संचालित करने के लिए किसी औपचारिक रजिस्ट्रेशन की आवश्यकता नहीं है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि संगठन सार्वजनिक विश्वास के आधार पर काम करता है और दशकों से काम कर रहा है, बिना किसी आधिकारिक कॉर्पोरेट दस्तावेज़ की आवश्यकता के। यह सरकार के औपचारिक रजिस्ट्रेशन स्टेटस पर ध्यान केंद्रित करने के विपरीत है।
निवेशकों और बाजार सहभागियों के लिए, यह समझना महत्वपूर्ण है कि RSS एक लिस्टेड कंपनी नहीं है, और न ही यह नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) या बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) पर कारोबार करने वाली कोई वाणिज्यिक इकाई है। परिणामस्वरूप, इस राजनीतिक और प्रशासनिक विवाद का भारतीय शेयर बाजार या किसी भी सूचीबद्ध कॉर्पोरेट संस्थाओं पर कोई वित्तीय, नियामक या परिचालन प्रभाव नहीं पड़ता है। इस खबर को फॉलो करने वाले पाठकों को इसे सार्वजनिक नीति और राजनीतिक बहस के मामले के रूप में देखना चाहिए, न कि व्यावसायिक या निवेश परिणामों वाले किसी घटना के रूप में।
