कर्नाटक के रूरल डेवलपमेंट मंत्रालय ने उन ग्राम पंचायतों में अवैध बैंक ट्रांजेक्शन की **30 दिन** की जांच शुरू की है, जो अर्बन लोकल बॉडीज में बदल चुकी हैं। बिदर जिले में आधिकारिक मुहर और हस्ताक्षरों के गलत इस्तेमाल के आरोपों पर सरकार सख्त है।
कर्नाटक सरकार ने उन ग्राम पंचायतों के खिलाफ 30 दिन की जांच का बिगुल फूंक दिया है, जो अर्बन लोकल बॉडीज (ULB) में तब्दील होने के बावजूद चोरी-छिपे बैंक ट्रांजेक्शन कर रही थीं। रूरल डेवलपमेंट और पंचायत राज मंत्री ईश्वर खंड्रे ने साफ किया है कि नगर पालिकाओं में विलय के बाद भी इन इकाइयों का वित्तीय लेनदेन करना नियमों का गंभीर उल्लंघन है।
जांच का केंद्र: बिदर जिला
इस मामले की आंच मुख्य रूप से बिदर जिले की कोलार, आलियाबाद और अमलापुर ग्राम पंचायतों तक पहुंची है। रिपोर्ट्स के अनुसार, ये पंचायतें 'बिदर सिटी म्युनिसिपल कॉरपोरेशन' में शामिल होने के बाद भी अपने बैंक खाते चला रही थीं और फर्जी तरीके से दस्तावेजों पर मुहर लगा रही थीं। सरकार अब इन सभी ट्रांजेक्शन की फॉरेंसिक जांच कराएगी ताकि मुहर और हस्ताक्षरों की असलियत का पता चल सके।
सख्त कार्रवाई की चेतावनी
मंत्री ईश्वर खंड्रे ने स्पष्ट कर दिया है कि अगर किसी कर्मचारी की मिलीभगत पाई गई, तो उसे तुरंत सस्पेंड कर दिया जाएगा। इतना ही नहीं, वित्तीय अनियमितताओं की पुष्टि होने पर संबंधित कर्मचारियों और बैंक अधिकारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर पुलिस कार्रवाई भी की जाएगी। यह जांच इस बात की भी समीक्षा करेगी कि एडमिनिस्ट्रेटिव बदलाव के दौरान सरकारी फंड की निगरानी के सिस्टम में कहां कमी रह गई।
