कर्नाटक के मंत्री KM Shivalinge Gowda अपने एक विवादित बयान को लेकर मुश्किल में घिर गए हैं। उन्होंने सुझाव दिया कि सरकारी अधिकारियों को समय पर काम करने के बदले 'टिप' देना गलत नहीं है, जिसके बाद भ्रष्टाचार को बढ़ावा देने के आरोपों के बीच विपक्ष ने उन पर हमला बोल दिया है।
यह पूरा मामला हसन जिले में एक जनसुनवाई (grievance redressal) के दौरान सामने आया। कांग्रेस नेता और मंत्री KM Shivalinge Gowda ने मंच से कहा कि जो अधिकारी समय पर काम निपटाते हैं, उन्हें 'टिप' या 'सम्मान राशि' देना एक नेक काम है। उनके इस बयान ने वहां मौजूद लोगों और सोशल मीडिया पर तुरंत विवाद खड़ा कर दिया, क्योंकि इसे सीधे तौर पर रिश्वतखोरी (bribery) को जायज ठहराने के रूप में देखा गया।
विपक्ष का तीखा हमला
इस बयान के सामने आते ही भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने मोर्चा खोल दिया। MLC CT Ravi ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि इस तरह के बयानों से सरकारी तंत्र में भ्रष्टाचार सामान्य हो जाएगा और शासन की नैतिकता पर गहरा असर पड़ेगा। यह घटना उस समय हुई है जब राज्य के मुख्यमंत्री DK Shivakumar लगातार जनता से भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठाने और शिकायत करने की अपील कर रहे हैं।
मंत्री की सफाई और प्रशासनिक दबाव
बढ़ते विवाद को देखते हुए मंत्री Gowda ने सफाई दी कि उनका मकसद रिश्वत को बढ़ावा देना नहीं था, बल्कि वे सिर्फ ईमानदार अधिकारियों के सम्मान की बात कर रहे थे। बैठक में मौजूद हसन की डिप्टी कमिश्नर KS Latha Kumari ने भी तनाव कम करने की कोशिश की।
निवेशकों के लिए संकेत
कर्नाटक में व्यापार और निवेश के लिहाज से पारदर्शिता और सुशासन (governance) अत्यंत महत्वपूर्ण है। प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा इस तरह की टिप्पणियां न केवल जनता का भरोसा कम करती हैं, बल्कि 'ईज ऑफ डूइंग बिजनेस' (Ease of doing business) के मोर्चे पर भी नकारात्मक संदेश भेजती हैं। फिलहाल, यह मामला राज्य में प्रशासनिक जवाबदेही पर एक बड़ी बहस छेड़ चुका है।
