कर्नाटक सरकार ने Gruha Lakshmi स्कीम के तहत **1.24 करोड़** लाभार्थियों के लिए अनिवार्य **30-दिवसीय** बायोमेट्रिक और फेसियल ऑथेंटिकेशन ड्राइव शुरू की है। **₹20 करोड़** के बजट वाले इस ऑडिट का मकसद फर्जी लाभार्थियों को हटाकर सिस्टम में पारदर्शिता लाना है, क्योंकि अब तक इस योजना पर **₹76,000 करोड़** से ज्यादा खर्च हो चुके हैं।
सरकारी खजाने की सफाई का मिशन
कर्नाटक सरकार ने 'Gruha Lakshmi' स्कीम की डेटाबेस इंटीग्रिटी बनाए रखने के लिए एक बड़ा री-वेरिफिकेशन अभियान छेड़ा है। 30 अगस्त, 2026 से शुरू हो रहे इस ड्राइव के तहत फील्ड कर्मचारी घर-घर जाकर लाभार्थियों की पहचान सुनिश्चित करेंगे। इसके लिए प्रशासन ने ₹20 करोड़ का फंड अलग से रखा है।
CAG की रिपोर्ट और फर्जीवाड़े का डर
यह कदम इसलिए जरूरी हो गया क्योंकि CAG की ऑडिट में सरकारी खजाने से जुड़ी खामियां सामने आई थीं। रिपोर्ट में पता चला कि कई ऐसे लोगों को भी लाभ मिल रहा था जो इस योजना के दायरे में नहीं आते, जैसे कि करदाता नागरिक या दिवंगत व्यक्ति। सरकार पहले ही लगभग 4.3 लाख अपात्र लाभार्थियों को लिस्ट से बाहर कर चुकी है, लेकिन अब यह फिजिकल वेरिफिकेशन इस प्रक्रिया को और सख्त बनाएगा।
कैसे होगी प्रक्रिया?
- डोर-टू-डोर वेरिफिकेशन: फील्ड कर्मचारी मोबाइल ऐप के जरिए GPS लोकेशन और फोटोग्राफिक एविडेंस के साथ पुष्टि करेंगे।
- विकल्प: जो लोग घर पर नहीं मिल पाएंगे, वे 'Grama One' सेंटर्स या Fair Price Shops पर जाकर अपनी पहचान वेरिफाई करवा सकेंगे।
- चेतावनी: वेरिफिकेशन न करवाने पर लाभार्थियों का नाम लिस्ट से हटाया जा सकता है।
रिस्क और चुनौतियां
यह प्रशासनिक पहल सरकारी खर्च को तर्कसंगत बनाने के लिए है, ताकि ₹2,000 की मासिक राशि केवल पात्र महिलाओं तक ही पहुंचे। हालांकि, तकनीकी खामियों या स्वास्थ्य कारणों से बुजुर्ग लाभार्थियों के बायोमेट्रिक न मिल पाने जैसे रिस्क भी बने हुए हैं। इस पूरी कवायद पर विपक्ष की नजरें भी टिकी हैं, जो पुरानी गड़बड़ियों की जांच की मांग कर रही है।
