कानपुर के बाढ़ प्रभावित मयापुरम इलाके में सरकारी राहत सामग्री के नाम पर एक्सपायर्ड कफ सिरप बांटे जाने का मामला सामने आया है। इसे पीने से कई बच्चे बीमार हो गए हैं, जिसके बाद इलाके में भारी आक्रोश है और सीएमओ डॉ. हरिदत्त नेमी ने जांच के आदेश दिए हैं।
क्या है पूरा मामला?
कानपुर के मयापुरम इलाके में प्रशासनिक लापरवाही की एक बड़ी घटना सामने आई है, जहां बाढ़ पीड़ितों के लिए आई सरकारी राहत सामग्री के साथ एक्सपायर्ड कफ सिरप बांट दी गई। पांडु नदी के जलस्तर के कारण परेशान स्थानीय लोगों को इस दवा ने और मुश्किलों में डाल दिया है। कफ सिरप का सेवन करते ही कई बच्चे बीमार पड़ गए, जिससे वहां अफरा-तफरी मच गई।
बीमार बच्चों का हाल
प्राप्त जानकारी के अनुसार, कम से कम 3 बच्चों (एक 4 साल और दो 3 साल के) को उल्टी और अन्य समस्याओं के चलते तुरंत मेडिकल सहायता की जरूरत पड़ी। हालांकि सिरप की पैकिंग पर एक्सपायरी डेट जुलाई 2026 लिखी थी, लेकिन दावा किया जा रहा है कि दवा पहले ही खराब हो चुकी थी। इस घटना के बाद आक्रोशित ग्रामीणों ने राहत टीम द्वारा दी गई बाकी सभी दवाओं को फेंक दिया है।
मुआवजे पर बढ़ा विवाद
प्रशासन की असंवेदनशीलता तब और खुलकर सामने आई जब राहत टीम के एक सदस्य ने पीड़ित बच्चे के इलाज के लिए महज ₹100 का मुआवजा देने की पेशकश की। बच्चों के माता-पिता ने इस तुच्छ राशि को सिरे से नकारते हुए इसे अपमानजनक बताया है।
आगे की कार्रवाई
मुख्य चिकित्सा अधिकारी (CMO) डॉ. हरिदत्त नेमी ने इस गंभीर चूक का संज्ञान लिया है। फिलहाल एक उच्च-स्तरीय जांच चल रही है, जिसमें यह पता लगाया जाएगा कि एक्सपायर्ड दवाइयां सरकारी स्टॉक तक कैसे पहुंचीं और इसकी जिम्मेदारी किसकी है। राहत कार्यों में हुई इस बड़ी गड़बड़ी के बाद अब स्थानीय लोगों का प्रशासन पर भरोसा पूरी तरह से डगमगा गया है।
