भारत के जॉब मार्केट में एक नया ट्रेंड देखने को मिल रहा है, जहाँ अनुभवी कॉर्पोरेट प्रोफेशनल्स अब गिग इकोनॉमी (Gig Economy) की ओर रुख कर रहे हैं। नोएडा में एक 56 वर्षीय पूर्व इंश्योरेंस प्रोफेशनल, मनोज, लेऑफ (Layoff) और उम्र के कारण नौकरी मिलने में आ रही दिक्कतों के चलते अब Porter जैसे प्लेटफॉर्म के लिए डिलीवरी पार्टनर के तौर पर काम कर रहे हैं।
कॉर्पोरेट जगत से गिग वर्क की ओर
टाटा एआईए लाइफ इंश्योरेंस (Tata AIA Life Insurance) में 14 साल बिताने के बाद, 56 वर्षीय मनोज 2023 में छंटनी का शिकार हुए। कॉर्पोरेट जगत में अपनी लंबी पारी के बाद, उन्हें अब गिग प्लेटफॉर्म्स पर आय के लिए निर्भर रहना पड़ रहा है। मनोज की कहानी ऐसे कई अनुभवी पेशेवरों की दुर्दशा को दर्शाती है जो उम्र और स्वास्थ्य संबंधी कारणों से कॉर्पोरेट भूमिकाओं में वापसी करने में असमर्थ पा रहे हैं।
यह स्थिति आधुनिक कार्यबल की चुनौतियों, खासकर उम्रवाद (Ageism) और उन व्यक्तियों के लिए गिग वर्क की स्थिरता पर सवाल उठाती है जिन्होंने दशकों तक संगठित रोजगार में काम किया है। Porter, जो Resbird Technologies का हिस्सा है, हजारों लोगों को तत्काल कमाई का अवसर प्रदान करता है, लेकिन यह पारंपरिक कॉर्पोरेट नौकरियों से मिलने वाली सामाजिक सुरक्षा और करियर ग्रोथ के लाभों से कोसों दूर है।
गिग सेक्टर की चुनौतियाँ
कई लोगों के लिए, गिग वर्क दैनिक खर्चों को पूरा करने का एक तात्कालिक जरिया है। हालाँकि, यह क्षेत्र अत्यधिक शारीरिक श्रम और अस्थिर आय के लिए जाना जाता है। मनोज को प्रति डिलीवरी ₹40 की कमाई होती है, जो डिलीवरी पार्टनर्स के लिए आम अस्थिरता और कम मार्जिन को उजागर करती है। ऐसे में, शारीरिक मेहनत और स्वास्थ्य जोखिमों का भी खतरा बना रहता है, जिससे वे ऐसी कंपनियों पर निर्भर हो जाते हैं जब अधिक स्थिर रोजगार के विकल्प उपलब्ध नहीं होते।
कॉर्पोरेट रीस्ट्रक्चरिंग का असर
अनुभवी कर्मचारियों का अचानक नौकरी खोना अक्सर कॉर्पोरेट रीस्ट्रक्चरिंग (Corporate Restructuring) का नतीजा होता है। कंपनियाँ लागत कम करने के लिए, अक्सर ऊँची सैलरी वाले वरिष्ठ कर्मचारियों की जगह युवा या कम लागत वाले टैलेंट को लाती हैं। ऐसे में, इन पेशेवरों के पास अक्सर कोई मजबूत सुरक्षा जाल (Safety Net) नहीं होता। टेक्नोलॉजी में तेजी और कॉर्पोरेट दक्षता उपायों के बीच, भारत में मध्य-से-वरिष्ठ स्तर के करियर की स्थिरता एक चिंता का विषय बनती जा रही है।
बाजार विश्लेषक (Market Analysts) श्रम रुझानों को अर्थव्यवस्था के स्वास्थ्य के संकेतक के रूप में देखते हैं। कुशल पेशेवरों का गिग वर्क की ओर बढ़ना औपचारिक नौकरी बाजार की गहरी समस्याओं को दर्शा सकता है, जैसे कि उद्योग की आवश्यकताओं और एक उम्रदराज़ कार्यबल की अपेक्षाओं के बीच तालमेल की कमी। जैसे-जैसे भारत अपनी लास्ट-माइल लॉजिस्टिक्स के लिए गिग इकोनॉमी पर निर्भर है, इन प्लेटफॉर्म्स की अपने विविध कार्यबल के लिए स्थिर और समान आजीविका प्रदान करने की क्षमता एक महत्वपूर्ण चर्चा का विषय बनी रहेगी।
