रांची में 23 दिनों से प्रदर्शन कर रहे JPSC और JSSC के छात्रों का आंदोलन अब एक गंभीर मोड़ ले चुका है। कई छात्र 13 दिनों से भूख हड़ताल पर हैं और CBI जांच की मांग कर रहे हैं। सरकार ने बदलाव का वादा किया है, लेकिन 20 अगस्त को CM आवास पर प्रदर्शन की योजना से तनाव बढ़ने की उम्मीद है।
क्या हैं छात्रों की मांगें?
झारखंड में सरकारी नौकरियों के लिए प्रदर्शन कर रहे छात्रों का गुस्सा बढ़ता जा रहा है। JPSC (झारखंड लोक सेवा आयोग) और JSSC (झारखंड कर्मचारी चयन आयोग) की परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों के खिलाफ छात्र पिछले 23 दिनों से रांची में धरना दे रहे हैं। प्रदर्शनकारी JSSC-CGL और 11वीं से 13वीं JPSC परीक्षाओं को रद्द करने की मांग कर रहे हैं। उनकी सबसे बड़ी मांग है कि इन भर्तियों की जांच CBI करे। इसके अलावा, वे राज्य के बाहर के रिटायर जजों से भी जांच कराने की अपील कर रहे हैं। JPSC-JSSC सुधार मंच के अनुसार, भर्ती प्रक्रिया में फैले भ्रष्टाचार ने युवाओं का भरोसा तोड़ दिया है।
भूख हड़ताल और बिगड़ते हालात
स्थिति की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि प्रेम नायक जैसे कई छात्र पिछले 13 दिनों से लगातार भूख हड़ताल पर हैं। उनकी सेहत को लेकर गंभीर चिंताएं जताई जा रही हैं। यह आंदोलन अब एक नाजुक दौर में पहुँच गया है।
सरकार का क्या है रुख?
हाल ही में स्वतंत्रता दिवस के मौके पर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने माना कि भर्ती परीक्षाओं को लेकर छात्रों का भरोसा कम हुआ है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि सरकार पेपर लीक या किसी भी तरह के भ्रष्टाचार में शामिल पाए जाने वाले लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करेगी। मुख्यमंत्री ने भर्ती प्रक्रियाओं में बड़े सुधारों की जरूरत पर भी जोर दिया। इसमें एक तय समय-सारणी के अनुसार सालाना परीक्षाओं का आयोजन, परीक्षाओं को सुरक्षित रखने के लिए नई तकनीकों का इस्तेमाल और भविष्य में धांधली रोकने के लिए कई स्तरों पर जवाबदेही तय करना शामिल है।
आगे क्या हो सकता है?
सरकार के वादों के बावजूद, छात्रों और प्रशासन के बीच गतिरोध खत्म होता नहीं दिख रहा है। छात्र संगठनों के बीच आगे की रणनीति पर चर्चाएं तेज हो गई हैं। उन्होंने 20 अगस्त को मुख्यमंत्री आवास को घेरने (घेराव) की योजना बनाई है। इसके अलावा, स्थानीय शिक्षण संस्थानों को बंद कराने जैसे कठोर कदम उठाने पर भी विचार किया जा रहा है ताकि सरकार पर दबाव बनाया जा सके।
क्षेत्रीय स्थिरता पर असर
झारखंड के कारोबारी और प्रशासनिक माहौल पर नजर रखने वालों के लिए यह स्थिति संस्थागत भरोसे और प्रशासनिक स्थिरता के महत्व को रेखांकित करती है। लंबे समय तक चलने वाले विरोध प्रदर्शन और सार्वजनिक सेवाओं में बाधा स्थानीय अर्थव्यवस्था और शासन-प्रशासन के सुचारू संचालन को प्रभावित कर सकती है। 20 अगस्त की तारीख नजदीक आने के साथ, यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि क्या सरकार और प्रदर्शनकारी नेता किसी समझौते पर पहुँच पाते हैं या फिर रांची में प्रशासनिक और सार्वजनिक सेवाओं में और अधिक बाधाएँ आती हैं।
