झारखंड में भर्ती परीक्षाओं से जुड़ा घोटाला गहराता जा रहा है। पूर्व JPSC प्रमुख एल. खियांग्ते को रिश्वतखोरी के आरोपों में गिरफ्तार किया गया है, वहीं प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने मनी लॉन्ड्रिंग की जांच शुरू कर दी है। इस मामले में सभी JPSC सदस्यों के इस्तीफे और राज्यव्यापी विरोध प्रदर्शनों ने प्रशासनिक अस्थिरता की ओर इशारा किया है।
क्या है पूरा मामला?
झारखंड की प्रशासनिक व्यवस्था में हड़कंप मच गया है। राज्य की CID ने झारखंड पब्लिक सर्विस कमीशन (JPSC) की पूर्व प्रमुख एल. खियांग्ते को गिरफ्तार कर लिया है। यह गिरफ्तारी भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं की जांच का हिस्सा है, जिसने पूरे राज्य में हफ्तों से उथल-पुथल मचा रखी है।
रिश्वतखोरी और धांधली के आरोप
CID की जांच में सामने आया है कि एल. खियांग्ते पर आरोप है कि उन्होंने कथित तौर पर ₹2 करोड़ की रिश्वत और 20% कमीशन TSR Data Processing Private Limited (TDPL) नामक कंपनी को परीक्षा से जुड़े कॉन्ट्रैक्ट देने के बदले में ली। चिंता की बात यह है कि इस एजेंसी को पहले ब्लैकलिस्ट भी किया जा चुका था। 10 अगस्त तक CID इस मामले में कुल 20 लोगों को गिरफ्तार कर चुकी है।
ED की एंट्री और मनी लॉन्ड्रिंग का शक
इसी बीच, प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने भी इस मामले में एक नया मोड़ ला दिया है। ED ने भर्ती परीक्षाओं से जुड़ी इन अनियमितताओं के तार मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़ने की आशंका में एक केस दर्ज कर लिया है। अब केंद्रीय एजेंसी इस मामले में पैसों के लेन-देन और सरकारी निधियों के दुरुपयोग की जांच करेगी।
JPSC सदस्यों का इस्तीफा
राज्य में भर्ती संस्थाओं की हालत इतनी बिगड़ गई कि 9 अगस्त, 2026 को JPSC के तीनों सदस्यों ने विरोध प्रदर्शनों के बीच अपने पद से इस्तीफा दे दिया। नागरिक सेवाओं की परीक्षाएं आयोजित करने वाली इस महत्वपूर्ण संस्था में अचानक आए इस खालीपन ने राज्य में भविष्य की सरकारी भर्तियों की समय-सीमा और विश्वसनीयता पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
आगे क्या?
राज्य में काम कर रहे व्यवसायियों और आम लोगों के लिए यह स्थिति गंभीर शासन जोखिमों को उजागर करती है। एक ब्लैकलिस्टेड एजेंसी का सरकारी कॉन्ट्रैक्ट मिलना, सख्त विक्रेता जांच और खरीद निगरानी की आवश्यकता पर जोर देता है। विपक्षी भारतीय जनता पार्टी (BJP) द्वारा 11 अगस्त, 2026 को बुलाई गई राज्यव्यापी 'बंद' ने इस क्षेत्र में संभावित परिचालन व्यवधानों और बढ़े हुए जोखिम के माहौल को और बढ़ा दिया है।
अब सबकी निगाहें ED की जांच की प्रगति पर टिकी हैं। साथ ही, यह देखना भी अहम होगा कि क्या राज्य सरकार छात्रों की मांग के अनुसार मामले की CBI जांच के आदेश देती है। JPSC में स्थिरता लाना और भर्ती विवादों का समाधान राज्य के प्रशासनिक कामकाज को सामान्य बनाने के लिए बेहद जरूरी होगा।
