झारखंड में सरकारी भर्तियों के लिए ली गई JPSC और JSSC परीक्षाओं में कथित धांधली के खिलाफ प्रदर्शन तेज हो गया है। आज प्रदर्शनकारियों ने राज्य विधानसभा का रुख किया, जहाँ इस मुद्दे को लेकर जोरदार हंगामा हुआ। यह लगातार 13वां दिन है जब अभ्यर्थी अपनी मांगों को लेकर सड़क पर हैं।
क्या है पूरा मामला?
झारखंड विधानसभा का मानसून सत्र आज शुरू हुआ, लेकिन शुरुआत से ही सियासी पारा गरमाया रहा। वजह बनीं राज्य में सरकारी नौकरियों के लिए आयोजित की गई 14वीं JPSC सिविल सेवा परीक्षा और JSSC-CGL भर्ती परीक्षा में कथित अनियमितताएं। अभ्यर्थियों और छात्र संगठनों का आरोप है कि इन परीक्षाओं में बड़े पैमाने पर धांधली हुई है। अपनी मांगों को लेकर छात्र पिछले 13 दिनों से लगातार प्रदर्शन कर रहे हैं। आज प्रदर्शनकारियों ने सीधे विधानसभा के अंदर हंगामा किया, जिससे सदन की कार्यवाही प्रभावित हुई।
CBI जांच की मांग पर अड़े प्रदर्शनकारी
विपक्ष, खासकर NDA के विधायकों ने विधानसभा के भीतर प्रदर्शन करते हुए इस मामले की जांच सेंट्रल ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टिगेशन (CBI) से कराने की मांग की है। उनका कहना है कि राज्य सरकार की अपनी जांच एजेंसियों पर उन्हें भरोसा नहीं है। प्रदर्शनकारियों की मुख्य मांगें हैं कि इन कथित तौर पर 'समझौता' किए गए परीक्षाओं को रद्द किया जाए और झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) व झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) द्वारा की जाने वाली भर्ती प्रक्रियाओं में पूरी तरह से सुधार किया जाए।
सरकार का पक्ष औरCID जांच
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने प्रश्नपत्र लीक के मुद्दे को राष्ट्रीय चिंता का विषय बताया है। राज्य सरकार का कहना है कि वे इस स्थिति को गंभीरता से ले रहे हैं। अब तक CID ने इस मामले में 19 लोगों को गिरफ्तार किया है। जांच के सिलसिले में पूर्व JPSC चेयरमैन L Khiangte से भी कई बार पूछताछ की जा चुकी है। सरकार ने छात्रों के एक प्रतिनिधिमंडल से बातचीत का प्रस्ताव भी दिया है ताकि इस मसले का हल निकाला जा सके।
भूख हड़ताल और बढ़ता दबाव
मामले की गंभीरता को देखते हुए 6 प्रदर्शनकारियों ने अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल भी शुरू कर दी है। प्रदर्शनकारियों की सेहत लगातार बिगड़ रही है, जो सरकार के लिए एक नई चुनौती पेश कर रही है। राज्य प्रशासन के लिए इस हंगामे को शांत करना और भर्ती प्रक्रियाओं में जनता का विश्वास बहाल करना एक बड़ी परीक्षा होगी।
