झारखंड में भर्ती परीक्षा घोटाला: CBI जांच की मांग परAssemblée तक मार्च

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AuthorAditya Rao|Published at:
झारखंड में भर्ती परीक्षा घोटाला: CBI जांच की मांग परAssemblée तक मार्च

लाखों युवा 10 अगस्त, 2026 को झारखंड विधानसभा के बाहर उतरे, भर्ती परीक्षाओं में धांधली के खिलाफ CBI जांच की मांग कर रहे हैं। 17 दिनों से जारी यह प्रदर्शन राज्य की भर्ती प्रणाली में बड़े एडमिनिस्ट्रेटिव और गवर्नेंस जोखिमों को उजागर करता है, जो ED और CID की जांच के दायरे में है।

हजारों अभ्यर्थी उतरे सड़कों पर

रांची में हज़ारों की संख्या में युवा सरकारी भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं की जांच के लिए CBI की मांग करते हुए झारखंड विधानसभा की ओर मार्च कर रहे थे। यह प्रदर्शन, जो अब 17वें दिन में प्रवेश कर चुका है, झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) और झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) द्वारा प्रबंधित प्रक्रियाओं की पारदर्शिता को लेकर राज्य के युवाओं और प्रशासन के बीच बढ़ते गतिरोध को दर्शाता है।

सुरक्षा के कड़े इंतज़ाम

पूरे शहर में भारी सुरक्षा बल तैनात थे, और विधानसभा मार्ग पर भीड़ को नियंत्रित करने के लिए निषेधाज्ञा लागू की गई थी। यह आंदोलन, जिसने व्यापक ध्यान खींचा है, तब भी जारी है जब राज्य सरकार का दावा है कि उसने प्रदर्शनकारियों की 98% मांगों को मान लिया है। आधिकारिक बयानों के अनुसार, इन उपायों में 14वें JPSC प्रारंभिक और बैकलॉग परीक्षाओं का रद्दीकरण शामिल है। हालांकि, प्रदर्शनकारियों का कहना है कि सरकार की रियायतें नाकाफी हैं, क्योंकि उन्होंने जांच के लिए पहचाने गए तेरह भर्ती परीक्षणों में से केवल तीन को रद्द करने का दावा किया है।

संस्थानों की स्थिरता पर सवाल

इस विवाद के मूल में राज्य संस्थानों की स्थिरता और अखंडता के बारे में एक व्यापक चिंता है। CID की जांच के बाद JPSC के तीनों सदस्यों ने 9 अगस्त, 2026 को इस्तीफा दे दिया, जो गहरी प्रशासनिक अस्थिरता का संकेत देता है। नेतृत्व का यह खालीपन, इन भर्ती निकायों के भीतर कथित वित्तीय अनियमितताओं में प्रवर्तन निदेशालय (ED) द्वारा चल रही जांच के साथ मिलकर, राज्य की मानव पूंजी के लिए महत्वपूर्ण अनिश्चितता पैदा करता है।

सरकार का पक्ष और गतिरोध

राज्य प्रशासन के लिए, प्राथमिक चुनौती बाहरी जांच की मांग बनी हुई है। सरकार का कहना है कि वह JSSC-CGL परीक्षा को CBI को नहीं सौंप सकती, क्योंकि यह प्रक्रिया अदालतों की निगरानी में हुई थी। यह इनकार वर्तमान विरोध प्रदर्शनों का मुख्य विवाद बिंदु बना हुआ है।

स्थिति अभी भी अनिश्चित है, और आने वाले हफ्तों में मुख्य निगरानी यह होगी कि राज्य JPSC और JSSC के भीतर प्रशासनिक संकट को कैसे हल करता है। ED और CID की जांचों से संबंधित और अधिक घटनाक्रम भी महत्वपूर्ण होंगे, क्योंकि व्यवस्थित विफलता या वित्तीय कदाचार के कोई भी निष्कर्ष भविष्य में राज्य-स्तरीय भर्ती कैसे आयोजित और पर्यवेक्षित की जाती है, इसमें व्यापक बदलाव ला सकते हैं।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.