जापान की संसद ने शाही गद्दी पर पुरुष वारिसों के एकाधिकार को बनाए रखने के लिए शाही घराने के कानून में अहम बदलाव किया है। इस नए कानून के तहत, दूर के पुरुष रिश्तेदारों को भी गोद लिया जा सकेगा और राजघराने की बेटियों की शादी के बाद भी उनका शाही स्टेटस बना रहेगा। इस बदलाव का मकसद शाही परिवार को स्थिर करना है, लेकिन यह लैंगिक समानता पर राष्ट्रीय बहस को भी हवा दे रहा है।
वारिसों का संकट
जापान ने शाही गद्दी के उत्तराधिकार से जुड़ा एक अहम कानून अपडेट किया है, जिसके तहत 'शाही घराने के कानून' (Imperial House Law) में बदलाव किया गया है। इसका मुख्य मकसद皇室 (Chrysanthemum Throne) पर पुरुष उत्तराधिकार को बरकरार रखना है। यह फैसला ऐसे समय में आया है जब शाही परिवार के सदस्यों की संख्या लगातार कम हो रही है, जिससे राजशाही की लंबी अवधि की स्थिरता पर सवाल उठ रहे हैं।
इस नए कानून के तहत, दूर के पुरुष रिश्तेदारों को शाही परिवार की शाखाओं से गोद लेने की औपचारिक इजाजत मिल गई है। बस शर्त यह है कि गोद लिए जाने वाले पुरुष की उम्र कम से कम 15 साल होनी चाहिए। शाही घराना लंबे समय से योग्य पुरुष वारिसों की घटती संख्या से जूझ रहा था। सरकार का मानना है कि पुरुष वारिसों को गोद लेने से皇室 की निरंतरता सुनिश्चित होगी।
शाही राजकुमारियों के स्टेटस में बदलाव
उत्तराधिकार के नियमों के अलावा, इस नए कानून में शाही राजकुमारियों के स्टेटस को लेकर भी बदलाव किया गया है। अब से, राजकुमारियों को आम आदमी से शादी करने के बाद भी अपने शाही टाइटल और स्टेटस को बनाए रखने की इजाजत होगी। हालांकि, यह ध्यान रखना अहम है कि इस बदलाव से उनके पति या बच्चों को उत्तराधिकार का अधिकार नहीं मिलेगा। इस फैसले का शाही परिवार की कई महिला सदस्यों पर असर पड़ेगा, जिनमें सम्राट नारुहितो की बेटी राजकुमारी आइको (Princess Aiko) भी शामिल हैं। राजकुमारी आइको जनता के बीच काफी लोकप्रिय हैं, लेकिन पुरुष उत्तराधिकार के मौजूदा नियम के तहत वह गद्दी की हकदार नहीं हैं।
सामाजिक और ऐतिहासिक बहस
इस कानूनी फैसले ने जापान में लैंगिक भूमिकाओं को लेकर सार्वजनिक और विद्वानों के बीच व्यापक चर्चा शुरू कर दी है। कानून के आलोचकों का कहना है कि महिलाओं को शाही गद्दी से बाहर रखना आधुनिक जापान में पुरानी पितृसत्तात्मक सोच को दर्शाता है। इतिहास गवाह है कि जापान पर पहले 8 महिला शासकों ने राज किया है, जिनमें से आखिरी 18वीं सदी में थीं। मौजूदा नियम, जो 1890 के शाही घराने के कानून से चला आ रहा है, को कई लोग लैंगिक समानता के वैश्विक मानकों से अलग मानते हैं।
शाही परिवार की सबसे युवा पीढ़ी पर दबाव बना रहेगा। सम्राट नारुहितो के भतीजे प्रिंस हिसाहितो (Prince Hisahito) फिलहाल सबसे युवा पुरुष वारिस हैं। राजशाही का भविष्य इस बात पर निर्भर करेगा कि प्रिंस हिसाहितो और भविष्य में गोद लिए गए वारिस अगली पीढ़ी को कैसे सुरक्षित कर पाते हैं। यह मुद्दा जापानी समाज में एक संवेदनशील विषय बना हुआ है।
