जापान ने अपनी रक्षा रणनीति में बड़ा बदलाव करते हुए ड्रोन और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) को तेजी से अपनाने का फैसला किया है। इसका मुख्य मकसद क्षेत्रीय सैन्य खतरों का सामना करना और अपनी रक्षा इंडस्ट्री को मॉडर्नाइज करना है।
इंडस्ट्री में बड़ा बदलाव और घरेलू फोकस
इस नई रक्षा नीति के तहत, जापान ने अपनी घरेलू रक्षा इंडस्ट्री को मजबूत करने पर खास जोर दिया है। एक्विजिशन, टेक्नोलॉजी और लॉजिस्टिक्स एजेंसी (Acquisition, Technology and Logistics Agency) ने 38 कंपनियों में से चार को ड्रोन के रैपिड डेवलपमेंट प्रोग्राम के लिए चुना है। इस महीने के अंत तक नौसैनिक परीक्षण (naval testing) शुरू होने की उम्मीद है। इस प्रोजेक्ट में, तोशिबा (Toshiba) ने स्टार्टअप Pro Drone के साथ मिलकर कॉम्बैट-रेडी सिस्टम विकसित करने के लिए साझेदारी की है। सरकार रक्षा से जुड़ी स्टार्टअप्स और रिसर्च में फंडिंग बढ़ा रही है ताकि टेक्नोलॉजी में तेजी से तरक्की हो सके।
सामरिक चुनौतियाँ और बाजार की बाधाएँ
हालांकि सरकार आधुनिकीकरण पर जोर दे रही है, लेकिन घरेलू उत्पादन को पूरी तरह से शुरू करने में कई व्यावहारिक दिक्कतें आ सकती हैं। जापानी कंपनियों के सामने एक बड़ी चुनौती ग्लोबल ड्रोन मार्केट में सस्ते चीनी इंपोर्ट का दबदबा है। कंपीटिटिव डोमेस्टिक विकल्प बनाने के लिए सिर्फ टेक्नोलॉजी ही नहीं, बल्कि बड़े पैमाने पर प्रोडक्शन की एफिशिएंसी भी जरूरी है। ऐसे में यह देखना अहम होगा कि ये डिफेंस कंपनियां बड़े प्रोडक्शन की तरफ बढ़ते हुए लागत और समय को कैसे मैनेज कर पाती हैं।
व्यापक रक्षा नीति और अंतर्राष्ट्रीय सहयोग
ड्रोन के विकास के अलावा, जापानी सरकार ने हाल ही में घातक हथियारों के एक्सपोर्ट पर लगे प्रतिबंधों को भी आसान किया है। इसका मकसद घरेलू रक्षा क्षेत्र को ज्यादा कमर्शियली वायबल और सहयोगी बनाना है। इसमें ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड और फिलीपींस जैसे देशों के साथ टेक्नोलॉजी ट्रांसफर और ज्वाइंट प्रोडक्शन जैसे अंतर्राष्ट्रीय पार्टनरशिप पर भी काम किया जा रहा है।
निवेशकों के लिए आगे क्या?
इस सेक्टर में शामिल कंपनियों पर लंबे समय में क्या असर पड़ेगा, यह कई फैक्टर्स पर निर्भर करेगा। निवेशकों को नए ड्रोन प्रोटोटाइप के नौसैनिक परीक्षणों की सफलता और इन कंपनियों द्वारा लगातार सरकारी कॉन्ट्रैक्ट हासिल करने पर नजर रखनी चाहिए। साथ ही, सरकार द्वारा एक्सपोर्ट नियमों को आसान करने के साथ, जापानी डिफेंस फर्म्स की अंतर्राष्ट्रीय सप्लाई चेन में इंटीग्रेट होने और ग्लोबल प्लेयर्स से मुकाबला करने की क्षमता उनके ग्रोथ पोटेंशियल का एक बड़ा इंडिकेटर होगी।
