जम्मू-कश्मीर में सुरक्षा बलों ने अपनी रणनीति में बड़ा बदलाव किया है। अब बड़े अभियानों की जगह छोटे और विदेशी आतंकवादी मॉड्यूल को निशाना बनाने के लिए सटीक (Precision) ऑपरेशंस पर जोर दिया जा रहा है, ताकि स्थानीय लॉजिस्टिकल नेटवर्क को खत्म कर पर्यटन और व्यापार के लिए सुरक्षित माहौल बनाया जा सके।
जम्मू-कश्मीर में सुरक्षा एजेंसियों ने अब एक नई ऑपरेशनल रणनीति अपनाई है। पहले के बड़े ऑपरेशंस के बजाय, अब सुरक्षा बल विदेशी आतंकवादियों के छोटे और मोबाइल मॉड्यूल को निशाना बनाने के लिए 'सर्च एंड डिस्ट्रॉय' मोड में काम कर रहे हैं। इस बदलाव का मकसद उन विदेशी तत्वों को खत्म करना है, जो क्षेत्र के ऊबड़-खाबड़ इलाकों का फायदा उठाकर छोटे स्तर पर गुरिल्ला हमले कर रहे थे।
नेटवर्क को जड़ से खत्म करने की तैयारी
अब रणनीति केवल आतंकियों तक सीमित नहीं है, बल्कि उनके पूरे सपोर्ट सिस्टम को ध्वस्त करने पर है। सुरक्षा बल उन स्थानीय 'फैसिलिटेटर्स' को ट्रैक कर रहे हैं, जो आतंकियों को भोजन, आश्रय और परिवहन जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराते हैं। इस लॉजिस्टिकल सपोर्ट को काटकर आतंकियों को अलग-थलग करने की कोशिश की जा रही है, जिससे उनके छिपने की जगह कम हो सके।
अर्थव्यवस्था और पर्यटन पर असर
इस सुरक्षा बदलाव का सीधा असर राज्य की अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा। टूरिज्म, हॉस्पिटैलिटी और स्थानीय सेवाओं को बढ़ावा देने के लिए राज्य में शांति और स्थिरता अनिवार्य है। सटीक ऑपरेशंस से आम जनजीवन में कम बाधा आएगी और निवेशकों का भरोसा भी बढ़ेगा।
चुनौतियां और भविष्य की राह
पीर पंजाल पर्वतमाला और चिनाब घाटी जैसे कठिन भौगोलिक क्षेत्रों में आतंकियों का छिपना और 'हिट एंड रन' हमले करना अब भी एक चुनौती बना हुआ है। हालांकि, 2019 के बाद से सक्रिय विदेशी आतंकियों की संख्या में भारी कमी आई है, लेकिन घुसपैठ की कोशिशों को देखते हुए सुरक्षा एजेंसियां हाई अलर्ट पर हैं। स्थानीय कारोबारियों और स्टेकहोल्डर्स के लिए यह खुफिया-आधारित रणनीति लंबे समय की स्थिरता और आर्थिक विकास का आधार साबित हो सकती है।
