जम्मू-कश्मीर सरकार ने राज्य की नाजुक पारिस्थितिकी (ecology) को बचाने के लिए एक नई टूरिज्म पॉलिसी का ड्राफ्ट पेश किया है। इसमें **15** प्रमुख पर्यटन स्थलों पर पर्यटकों की संख्या सीमित करने, गाड़ियों पर पाबंदी लगाने और 'ग्रीन सेस' लगाने का प्रस्ताव है, जिससे हॉस्पिटैलिटी सेक्टर के बिजनेस मॉडल बदल सकते हैं।
जम्मू-कश्मीर प्रशासन ने 'Sustainable Mountain Development Policy 2026' का ड्राफ्ट जारी किया है, जो राज्य के पर्यटन के भविष्य को पूरी तरह बदलने वाला है। इसका सीधा असर गुलमर्ग, पहलगाम, सोनमर्ग और पटनीटॉप जैसे 15 बड़े टूरिस्ट डेस्टिनेशन्स पर पड़ेगा।
नई पॉलिसी के मुख्य बिंदु
- कैरी-कैपेसिटी और रजिस्ट्रेशन: अब हर जगह के लिए 'साइंटिफिक कैरिंग-कैपेसिटी' तय की जाएगी। यानी अब ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन के जरिए यह तय होगा कि एक दिन में कितने पर्यटक वहां जा सकते हैं।
- ट्रांसपोर्ट में बदलाव: संवेदनशील इलाकों में प्राइवेट गाड़ियों के प्रवेश पर रोक लग सकती है। सरकार का जोर इलेक्ट्रिक वाहनों, साइकिल और पैदल चलने वाले नेटवर्क पर है।
- ग्रीन सेस (Green Cess): विदेशी पर्यटकों पर नया टैक्स लगाने का प्रस्ताव है, जिससे 'माउंटेन ग्रीन फंड' बनेगा। इसका मकसद अगले 3 सालों में कचरा प्रबंधन और स्वच्छता को दुरुस्त करना है।
कारोबारियों के लिए क्या है संकेत?
यह बदलाव हाई-वॉल्यूम (भीड़भाड़) से हटकर हाई-वैल्यू टूरिज्म की ओर बढ़ने का इशारा है। हालांकि, छोटे होटल और ट्रांसपोर्ट यूनियंस के लिए यह चिंता का विषय हो सकता है, क्योंकि उनका रेवेन्यू मॉडल भारी संख्या में आने वाले पर्यटकों पर निर्भर है। नवंबर 2026 तक यह सिर्फ एक ड्राफ्ट है, जिसे अभी कानून का रूप लेना बाकी है। निवेशकों को यह देखना होगा कि क्या सरकार पाबंदियां लागू करने से पहले वैकल्पिक इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार कर पाती है या नहीं।
